गोवर्धन लीला (Govardhan Leela) के बाद समस्त ब्रजमंडल (Brajmandal) में श्री कृष्ण (Shri Krishna) के नाम की चर्चा होने लगी। सभी ब्रजवासी (Brajvasi) कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी।

