वार्षिक पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के वर्ष 2022 में 78 गीगावॉट से वर्ष 2027 में दोगुना होकर 155 गीगावॉट हो जाने की संभावना है। इससे अगले मात्र पांच वर्षों के दौरान वैश्विक स्तर पर कुल पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 1500 गीगावॉट से ज्यादा हो जाएगी।
पवन बिजली उद्योग (wind power industry) 2025 तक, ओनशोर या तटवर्ती और ऑफशोर या अपतटीय, दोनों बाज़ारों में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए वर्ष 2027 तक 680 गीगावाट की रिकॉर्ड स्थापना की उम्मीद कर रहा है। सप्लाई चेन की रुकावटों को दूर करने के लिया नीति निर्माताओं को 2026 से काम करने की ज़रूरत है।
भारत ने वैश्विक पवन ऊर्जा निर्यात केंद्र (Global Wind Energy Export Center) बनने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
भारत साल 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता (non-fossil power potential) को 500 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगा और इस लक्ष्य का आधा रिन्यूबल ऊर्जा (renewable energy) से हासिल किया जाएगा। साथ ही, उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी और 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी कि भी घोषणा मोदी जी ने की है।

