भारत में अनेक प्राचीन मंदिर है और हर मंदिर की एक चमत्कारिक कथा हैं। इन मंदिरों का जिक्र ग्रंथों में भी मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के अलनगुड़ी में स्थित है। इस मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस पावन स्थान पर देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की अराधना करके नवग्रहों में प्रथम स्थान का आशीर्वाद पाया था।
पूरी दुनिया में मान्यता है कि काशी में 33 कोटि देवी-देवता के अलावा देवताओं के गुरु बृहस्पति विराजते है। मोक्ष नगरी काशी में इस गुरु बृहस्पति मंदिर की पौराणिक मान्यता है। अनादि काल से इस जीवंत मंदिर में स्वतः देव गुरु विराजते हैं। दरसअल सावन के इस पवित्र महीने में देव गुरु बृहस्पति (Guru Brihaspati) का सावन (Sawan) के पहले गुरुवार को हरियाली श्रृंगार (Hariyali Shringar) किया जाता है।
