जो भी वस्तु इस बरमूडा त्रिभुज के पास जाता है, उसका नामोनिशान तक नहीं मिलता। वहीं, माना जाता है कि इस रहस्यमय बरमूडा त्रिभुज का संबंध भगवान हनुमान जी (Hanuman ji) के साथ है।
शंकर जी बोले-हे उमा, कालकारमुख नामक एक भयानक बलवान राक्षस हुआ। ग्यारह मुख वाले उस विकराल राक्षस ने बहुत काल...
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।
भारत में एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी (Hanuman ji) की पूजा नहीं की जाती है। यह जगह है उत्तराखंड स्थित द्रोणागिरि गांव। यहां के लोगों का मानना है कि हनुमान जी जिस पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए उठाकर ले गए थे, वह यहीं स्थित था। चूंकि द्रोणागिरि के लोग उस पर्वत की पूजा करते थे, इसलिए वे हनुमानजी द्वारा पर्वत उठा ले जाने से नाराज हो गए। यही कारण है कि आज भी यहां हनुमान जी की पूजा नहीं होती।
प्रभु राम के सबसे बड़े भक्त माने जाने वाले कलयुग के जीवित देवता हनुमान जी (Hanuman ji) तब अधिक प्रसन्न होते हैं जब उनके भक्त राम नाम का जाप करते हैं। मान्यता है कि जहां कहीं भी राम कथा चलती है वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में उपस्थित होते ही हैं। माता सीता से हनुमान जी को अजर-अमर रहने का वरदान प्राप्त है।
यदि कोई भक्त सावन के मंगलवार के दिन पर भगवान हनुमान की पूजा सच्ची श्रद्धा से करता है तो उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन हनुमानजी की पूजा-आराधना से देवाधिदेव भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान जी (Hanuman ji) कलयुग के देवता (Kalyug ke Devta) है, इसलिए सबसे ज्यादा भक्त उनके ही हैं। संकट मोचन हनुमान (Sankat Mochan Hanuman) अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं और उन्हें बल, बुद्धि, यश का वरदान देते हैं। सभी जानते हैं कि हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है, लेकिन हनुमान जी की शादी हुई थी। उसके बाद भी उन्हें ब्रह्मचारी कहा जाता है। ऐसा क्यों?
काशी (Kashi) यानी वाराणसी (Varanasi) में हनुमान जी (Hanuman ji) का मंदिर आस्था और विश्वास का बहुत बड़ा धार्मिक स्थल माना गया है। संकटमोचन मंदिर (Sankatmochan Mandir) के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है।
देशभर में हनुमान जी (Hanuman ji) के कई चमत्कारी मंदिर है। इन मंदिरों में कहीं बजरंगबली (Bajrangbali) लेटे हुए, कहीं बैठे हुए तो कहीं उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा देखी होगी। लेकिन गुजरात के द्वारका में हनुमान जी का एक अनोखा ही मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। जी हां आपको जानकर आश्चर्य जरुर हुआ होगा, क्योंकि हनुमान जी तो बालब्रह्मचारी थे। जानिए, इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
लाल पताका जिस पर श्री राम लिखा और हनुमान जी का चित्र अंकित हो, घर के आगे लगाने वाले बंधनवार जो कि लाल रक्षासूत्र से बने हो। ये सब हनुमान जी के चिन्ह हैं। इन्हें घर पर लगाने से स्वतः ही प्रभु के होने का आभास होता है।
राम और रावण युद्ध के बाद जब प्रभु श्रीराम अयोध्या (Ayodhya) लौट आए तो उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन कराया।...
सोने की लंका पार्वती जी ने ही बनवाई थी, जानें पूरी गाथा





