International Energy Agency के अनुसार पश्चिम एशिया में ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर पड़े असर को पूरी तरह बहाल करने में लगभग दो वर्ष लग सकते हैं। क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति बाधाओं से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव बना हुआ है।
ग्लोबल स्टील प्लांट ट्रैकर के डेटा के वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कोयला आधारित स्टील उत्पादन क्षमता में वृद्धि का लगभग पूरा काम (99 प्रतिशत) एशिया में ही हो रहा है और चीन तथा भारत की इन परियोजनाओं में कुल हिस्सेदारी 79 प्रतिशत है।
भारत वर्ष 2030 तक अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ाने की योजना पहले से ही बना रहा है, मगर ऐसा करने के लिये 293 बिलियन डॉलर की जरूरत पड़ेगी। वैश्विक थिंक टैंक ‘एम्बर’ की एक नयी रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है।


