कहते हैं कि भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की 16,108 पत्नियां थीं। क्या यह सही है? इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं और लोगों में इसको लेकर जिज्ञासा भी है। आइए, जानते हैं कि कृष्ण की 16,108 पत्नियां होने के पीछे राज क्या है?
महर्षि वेद व्यास रचित महाभारत के मौसल पर्व में भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु और उनकी द्वारका नगरी के समुद्र में समा जाने का विवरण दिया गया है।
जब भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) अपने बाल्यावस्था में थे। उस समय ब्रह्मा जी को पता चला कि भगवान विष्णु स्वयं श्री कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं, तो उनके मन में श्री कृष्ण के दर्शन करने का विचार आया। वह ब्रह्मलोक से पृथ्वी पर आए और देखा कि अपने सिर पर मोर मुकुट को धारण किए एक बालक गायों और ग्वालों के साथ मिट्टी में खेल रहा है।
एक बार भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के मन में आया कि आज गोपियों को अपना ऐश्वर्य दिखाना चाहिये। ये सोचकर जब भगवान निकुंज में बैठे थे, और गोपियाँ उनसे मिलने आ रही थी। तब भगवान कृष्ण विष्णु (Lord Vishnu) के रूप चार भुजाएँ प्रकट कर के बैठ गए। जिनके चारो हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म था।
एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन (Arjun) कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा- हे प्रभु! एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ ? तब श्री कृष्ण जी (Krishna ji) ने कहा-अर्जुन! तुम मुझ से बिना किसी हिचक, कुछ भी पूछ सकते हो। तब अर्जुन ने कहा कि मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई है। कि दान तो मैं भी बहुत करता हूँ, परंतु सभी लोग सूर्य पुत्र कर्ण (Karan) को ही सब से बड़ा दानी क्यों कहते हैं?



