महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nasik) के वणी गांव में सप्तश्रृंगी मंदिर (Saptashringi Temple) स्थित है। मान्यतानुसार, महाराष्ट्र में देवी के साढ़े तीन शक्तिपीठ (Shaktipeeth) में से अर्धशक्तिपीठ (Ardhashaktipeeth) वाली सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं।
कलश स्थापना के पूर्व गोरखनाथ मंदिर परिसर में परंपरागत भव्य कलश शोभायात्रा श्रद्धाभाव से निकाली गई। शाम करीब साढ़े पांच बजे मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ को गोरक्षपीठाधीश्वर ने परंपरागत रूप से अपने हाथों से शिवावतारी गुरु गोरक्षनाथ का त्रिशूल देकर रवाना किया। योगी कमलनाथ के नेतृत्व में साधु-संतों की शोभायात्रा मां दुर्गा के जयघोष के बीच पौराणिक मान्यता वाले भीम सरोवर पर पहुंची।
Bilai Mata Mandir: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धमतरी (Dhamtari) जिले में स्थित बिलाई माता मंदिर (Bilai Mata Mandir) जिसे विंध्यवासिनी मंदिर...
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलरामपुर (Balrampur) जिले में देवी के 51 शक्तिपीठों (Shaktipeeth) में से एक पीठ स्थित है, जिसे मां पाटेश्वरी देवी मंदिर (Maa Pateshwari Devi Mandir) से जाना जाता है। यह मंदिर शिव और सती के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
चैती देवी मंदिर (Chaiti Devi mandir) उत्तराखंड (Uttarakhand) के उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर (Kashipur) सिटी बस स्टैंड से 2.5 किमी दूर काशीपुर के कुंडेश्वरी रोड पर स्थित है। चैती देवी मंदिर को माता बालसुंदरी मंदिर (Mata Balasundari mandir) के नाम से भी जाना जाता है, कई भक्त यहां आध्यात्मिक आनंद में डूबने और पवित्र मंदिर के दर्शन करने आते हैं। मंदिर को ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Mandir) और उज्जैनी देवी (Ujjaini Devi) के नाम से भी जाना जाता है। यह काशीपुर के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है।
माता सती (Mata Sati) के जहां-जहां अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ (Shaktipeeth) के रूप में स्थापना हुई। धर्मग्रंथों में कुल 51 शक्तिपीठों की मान्यता है। इन्हीं शक्तिपीठों में एक हैं माता हरसिद्धि हैं। यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। इनका मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन (Ujjain) और गुजरात (Gujarat) के द्वारका दोनों जगह स्थित हैं।

