हिंदू धर्म में सूर्य की उपासना अति शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है। रविवार के दिन सूर्यदेव (Surya Dev) की पूजा के लिए करने के लिए प्रातः जल्द सोकर उठें। जब सूर्य उदय हो तब सूर्य देव को प्रणाम करें और 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नम:' कहकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
सूर्यदेव (Surya Dev) अकेले एक ऐसे देवता जिनके साक्षात दर्शन हमें प्रतिदिन होते हैं। जिनके प्रताप से ही हम समय की खोज कर सके हैं। जिन्हें समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है। जिन्हें आदित्य, भास्कर, मार्तण्ड आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
सूर्य देव ने देखा कि इतना सब के बाद भी समुद्र के जल स्तर में रत्ती भर की कमी नहीं आई थी और न ही स्वयं के तेज में। जबकि इस कार्य में सहयोगी हवा भी सोंधी महक से सुरभित हो गई थी।
उषाकाल में पूर्व दिशा से अपने रथ पर सवार हो सूर्य देव (Surya Dev) निकलते है। सूर्यदेव जिनके रथ को सात अश्वों द्वारा खींचा जाता है। जिनके सारथी अरुण है, जो विष्णु के वाहन गरुड़ के भाई है। अब ख़ास बात ये हैं कि सूर्यदेव के रथ में सात घोड़ों का अर्थ क्या है?
सनातन संस्कृति के अनुसार कलयुग के एक मात्र दिखने वाले देवता सूर्य देव (Surya Dev) ही हैं। सूर्य देव को आरोग्य का कारक भी माना जाता है। सूर्य ब्रह्मण्ड की केंद्रीय शक्ति हैं। यह सम्पूर्ण सृष्टि का गतिदाता हैं।
यदि आपको सूर्य भगवान (Surya Bhagwan) के दर्शन न हो तो रोज की तरह पूर्व दिशा में मुँह करके किसी...
सूर्य की पूजा से जीवनशक्ति, मानसिक शांति, ऊर्जा और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव को उगते और डूबते दोनों तरह से अर्घ्य दिया जाता है।
शास्त्रों में सबसे ऊपर सूर्य देव का स्थान माना गया है। अगर सूर्य देव की पूजा की जाए तो कहा जाता है कि व्यक्ति के हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। सूर्य देव के कई नाम हैं। इन सभी नामों का महत्व अलग है।
भारत में उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर ऐसे तो विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) की पवित्र देवभूमि में भी भगवान सूर्यदेव साक्षात विराजते हैं कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) के रूप में।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य ब्रह्मस्वरूप है, सू्र्य से जगत उत्पन्न होता है। सूर्य नवग्रहों में प्रमुख देवता हैं। सूर्यदेव की दो भुजाएं हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान हैं। उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। उनके सिर पर सुंदर स्वर्ण मुकुट और गले में रत्नों की माला है। सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार हैं।
यदि आपको सूर्य देव (Surya Dev) के दर्शन न हो तो रोज की तरह पूर्व दिशा में मुँह करके किसी...





