रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। बहनें अपने भाई की लंबी और स्वस्थ उम्र की कामना करती हैं और माथे पर तिलक लगाकर कलाई पर राखी बांधती हैं और उन्हें मिठाई खिलाती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर अपने प्यार का इजहार करते हैं और हमेशा उनकी रक्षा करने का वादा करते हैं। यह पर्व प्राचीन काल से हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल रक्षा बंधन 22 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। हालांकि ‘मुहूर्त’ 21 अगस्त की शाम से शुरू होगा, उदय तिथि 22 अगस्त को है। इसलिए इस दिन बहनें राखी बांधेंगी।
कैसे सजाएं थाली
राखी, केसर, सरसों, चंदन, चावल और दूर्वा ध्वनि के लिए थाली सजाते समय रेशमी कपड़े के एक टुकड़े में रखा जाता है और फिर प्रार्थना की जाती है। राखी (रक्षा सूत्र) भगवान शिव को अर्पित की जाती है, इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है, इससे पहले कि एक बहन अपने भाई की कलाई पर इसे बांधे। इस शुभ दिन पर भगवान के आशीर्वाद से सब कुछ ठीक हो जाता है।
रक्षा बंधन पर नहीं है भद्रा का साया
रक्षा बंधन के पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं है। बहनें पूरे दिन स्नेह की डोर से भाइयों की कलाइयां सजा सकेंगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन के दिन श्रावण पूर्णिमा, धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन संयोग को उत्तम माना गया है। रक्षाबंधन के दिन तीन खास संयोग भाई-बहन के लिए लाभकारी साबित होंगे।
रक्षा बंधन की कथा
रक्षा बंधन के लिए ऐसी मान्यता है कि राजा बलि ने एक बार भगवान विष्णु को भक्ति के बल पर जीत लिया और उनसे यह वरदान मांगा कि अब आप मेरे ही राज्य में रहें, भगवान मान गए और उसी के राज्य में रहने लगे। उनके वापस न आने से लक्ष्मी दुखी रहने लगीं। तब एक बार नारद के परामर्श पर लक्ष्मी पाताल लोक गईं और बलि के हाथ पर रखी बांधकर उन्हें भाई बनाया और फिर उन्होंने बलि से निवेदन कर विष्णु को वापस लेकर वैकुंठ धाम ले आईं। तब से ही रक्षा बंधन की परंपरा चल रही है।
शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन 22 अगस्त को सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक शोभन योग रहेगा। यह योग शुभ फलदायी होता है। इसके साथ ही रक्षाबंधन के दिन रात 7 बजकर 40 मिनट तक धनिष्ठा योग रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास की पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त को शाम सात बजे से प्रारंभ हो रही है।
इसका समापन 22 अगस्त को शाम 5 बजकर 31 मिनट पर होगा। आमतौर पर भद्रा के कारण बहनों को राखी बांधने के लिए समय कम ही मिलता रहा है। इस बार भद्रा नहीं होने से राखी बांधने के लिए 12 घंटे और 11 मिनट की अवधि का दीर्घकालीन शुभ मुहूर्त है। राखी सुबह 5 बजकर 50 मिनट से शाम 6 बजकर 3 मिनट तक कभी भी बांधी जा सकेगी।

