Europe Heatwave: UK, फ्रांस और स्पेन में क्यों पड़ रही है इतनी गर्मी?

Europe Heatwave: इस साल मई में यूरोप की सड़कों पर घूमते हुए एक ब्रिटिश पर्यटक को सुबह 11 बजे ही पिना कोलाडा का आनंद लेते देखा गया। उसने France24 से कहा, “बहुत गर्मी है, बेहद गर्मी पड़ रही है।” यह टिप्पणी उस असामान्य मौसम की झलक देती है, जिसने इस समय ब्रिटेन समेत पूरे यूरोप को अपनी चपेट में ले रखा है।

दरअसल, महाद्वीप इन दिनों एक शक्तिशाली ‘हीट डोम’ की गिरफ्त में है। हाई-प्रेशर सिस्टम के नीचे फंसी गर्म हवा का यह विशाल घेरा तापमान को सामान्य से कहीं अधिक ऊपर धकेल रहा है, जिससे कई देशों में भीषण गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं।

मंगलवार को यूरोप के लाखों लोग असाधारण तापमान का सामना कर रहे थे। गर्मी से राहत पाने के प्रयास में फ्रांस में पिछले सप्ताह तैराकी और जलाशयों में जाने के दौरान डूबने से 40 लोगों की मौत हो गई।

उधर, ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) ने बुधवार और गुरुवार के लिए ‘रेड एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है। अनुमान है कि तापमान 39 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक पहुंच सकता है, जिससे जून महीने के अब तक के सर्वाधिक तापमान का रिकॉर्ड टूट सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ इलाकों में पारा इससे भी ऊपर जा सकता है।

फ्रांस में मौसम का अनुमान लगाने वालों ने कहा कि इस हफ़्ते पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है, जो जून के महीने के लिए अभूतपूर्व होगा। मेटियो-फ्रांस ने कहा कि “दिन और रात, दोनों समय असाधारण रूप से उच्च तापमान” रहने की उम्मीद है।

स्पेन की राष्ट्रीय मौसम सेवा, एमेत (Aemet) ने भी मंगलवार को दक्षिणी अंडालूसिया में 44 डिग्री सेल्सियस (111 डिग्री फ़ारेनहाइट) तापमान के लिए रेड अलर्ट जारी किया। साथ ही, उत्तरी अटलांटिक तट के पास आमतौर पर सामान्य तापमान वाले कैंटाब्रिया और बास्क कंट्री क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुँचने की चेतावनी भी दी।

कई विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, मौसम के हिसाब से असामान्य रूप से गर्म इस मौसम की वजह तथाकथित “हीट डोम” है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “हीट डोम दुनिया भर में बनते हैं, और इस हफ़्ते यूरोप के ऊपर बना हीट डोम ब्रिटेन, स्पेन और फ्रांस में कई दिनों तक रिकॉर्ड के करीब तापमान बनाए हुए है।”

क्या है हीट डोम?
UNDDR ने एक वीडियो में बताया कि हीट डोम तब बनता है जब उच्च दबाव वाली हवा का एक विशाल बुलबुला किसी क्षेत्र के ऊपर ठहर जाता है।

इसमें कहा गया है, “यह बर्तन के ढक्कन की तरह गर्मी को रोककर रखता है।”

एजेंसी के अनुसार, ऐसा तब होता है जब जेट स्ट्रीम — हवा की एक तेज़ धारा जो आमतौर पर मौसम प्रणालियों को आगे बढ़ाती है — धीमी हो जाती है या रुक जाती है।

जब ऐसा होता है, तो हीटवेव (लू), मूसलाधार बारिश या जंगल की आग जैसी चरम मौसम की घटनाएँ कई दिनों या हफ़्तों तक एक ही जगह पर फंसी रहती हैं।

ओमेगा ब्लॉक के कारण बनता है ‘हीट डोम’
ओमेगा ब्लॉक और हीट डोम संबंधित हैं लेकिन एक ही चीज़ नहीं हैं। आसान शब्दों में कहें तो, ओमेगा ब्लॉक कारण है और ‘हीट डोम’ उसका परिणाम है।

रॉयटर्स ने एक मौसम विश्लेषक के हवाले से कहा कि तथाकथित “ओमेगा ब्लॉक” मौसम पैटर्न यूरोप में भीषण और धीमी गति से चलने वाली हीटवेव का कारण बन रहा है, जिससे पूरे महाद्वीप में अधिकारियों को गर्मी की चेतावनी जारी करनी पड़ रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पैटर्न को “ओमेगा ब्लॉक” के रूप में जाना जाता है, जिसमें केंद्र में गर्म हवा का एक गुंबद फंसा होता है और दोनों तरफ ठंडी हवा के द्रव्यमान होते हैं।

इसे ओमेगा ब्लॉक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह ग्रीक अक्षर (ओमेगा) का आकार लेता है, जिसमें बीच में गर्म हवा का उभार और दोनों तरफ ठंडी हवा होती है, जिससे तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता रहता है।

रॉयल मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी (RMS) बताती है कि इसकी स्थिति और ताकत… जेट स्ट्रीम की वजह से ‘ब्लॉकिंग’ वाली स्थितियां बन सकती हैं, जैसे कि ‘ओमेगा ब्लॉक’। इसमें दो कम दबाव वाले सिस्टम के बीच उच्च दबाव वाला क्षेत्र फंस जाता है, जिससे ग्रीक अक्षर Ω (ओमेगा) जैसा आकार बनता है।

जेट स्ट्रीम पृथ्वी की सतह से काफी ऊंचाई पर चलने वाली तेज़ हवाएं हैं, जो कम दबाव वाले क्षेत्रों को बनाने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। ये अक्सर पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं, “लेकिन कभी-कभी ये रुक या फंस सकती हैं—अक्सर तब, जब जेट स्ट्रीम कमज़ोर पड़ जाती है और उसमें मोड़ या घुमाव आ जाता है।”

हाई प्रेशर (उच्च वायुदाब) मौसम के मोर्चों (weather fronts) को आगे बढ़ने से रोकता है, इसलिए वे या तो हाई प्रेशर वाले इलाके के किनारों से होकर गुजरते हैं या फिर वहीं रुक जाते हैं।

रॉयल मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी (RMS) का कहना है, “ओमेगा ब्लॉक के नीचे आपकी स्थिति तय करेगी कि आपको कैसा मौसम मिलेगा। हाई प्रेशर के नीचे मौसम आमतौर पर सूखा और स्थिर रहता है, जबकि लो प्रेशर (निम्न वायुदाब) से बारिश और तेज हवाओं वाले हालात बनते हैं। मौसम के ऐसे ब्लॉक कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं, जैसा कि 1976 की गर्मियों में हुआ था।”

आखिर क्या है ‘हीट डोम’, जो यूरोप को झुलसा रहा है?
रॉयल मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी (RMS) का कहना है कि हाई प्रेशर वाले जिद्दी इलाके के साथ समस्या यह है कि हाई प्रेशर के नीचे फंसी पहले से गर्म हवा और भी गर्म होती जाती है, जिससे ‘हीट डोम’ बन जाता है।

वे समझाते हैं, “गर्म हवा ऊपर वायुमंडल में उठेगी, लेकिन हाई प्रेशर एक ढक्कन की तरह काम करता है और हवा को नीचे बैठने या दबने पर मजबूर करता है। जैसे-जैसे हवा नीचे बैठती है, दबाव के कारण वह गर्म होती जाती है और गर्मी बढ़ती जाती है। ज़मीन भी गर्म हो जाती है, नमी खो देती है और और भी ज़्यादा गर्म होना आसान हो जाता है।”

वे आगे कहते हैं, “जब तक प्रेशर का पैटर्न नहीं बदलता, हाई प्रेशर गर्मी के हालात को और खराब करता रहेगा, जिससे जंगल की आग, सूखे और गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाएगा।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों की वजह से हो रहा जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) ऐसे पैटर्न की संभावना को बढ़ा रहा है।

आखिर इतना गर्म क्यों हो रहा है यूरोप?
UK MET ने 17 जून को कहा कि बन रही हीटवेव (लू) महाद्वीपीय यूरोप के ऊपर बन रहे हाई प्रेशर के एक मजबूत इलाके की वजह से हो रही है।

उन्होंने समझाया, “यह हाई प्रेशर हवा को बड़े पैमाने पर नीचे बैठने में मदद करता है, जिससे बादल नहीं बन पाते, लंबे समय तक धूप रहती है और दबाव से पैदा होने वाली गर्मी के कारण तापमान बढ़ता है।”

दो हवाओं के घेरे में फंसा UK
जहां यूरोप गर्म हो रहा है, वहीं UK में एक ज़्यादा जटिल और बदलने वाला पैटर्न देखने को मिलेगा। UK MET ने कहा कि उत्तर-पश्चिम में लो प्रेशर की वजह से बादल, बारिश और ताज़ी हवा आती रहेगी।

उन्होंने आगे कहा, “साथ ही, महाद्वीप से गर्म हवा का बढ़ता हुआ दायरा उत्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करेगा। इससे UK में एक बड़ा अंतर पैदा होगा, जिसमें गर्म और ठंडी हवाओं के बीच की सीमा – जिसे ‘बैरोक्लिनिक ज़ोन’ कहा जाता है – देश के ऊपर या उसके पास बन जाएगी।”

इसका असर?
इस सीमा के साथ-साथ मौसम के मोर्चे बनेंगे और धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे, जिससे बारिश होगी, खासकर उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में। UK MET ने आगे कहा, “इसका नतीजा एक ‘लहराते’ हुए फ्रंट के तौर पर सामने आएगा, जिसमें बारिश की पट्टियाँ कई दिनों तक एक ही इलाके में घटती-बढ़ती रहेंगी।”

(एजेंसी इनपुट के साथ)