Trump Tariff Pressure: भारत-US ट्रेड डील पर बढ़ा दबाव, क्या निकलेगा रास्ता?

Trump Tariff Pressure: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इसका असर भारत जैसे रूसी ऊर्जा के बड़े आयातकों पर भी पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बिल पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं। यह बयान अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा बिल को मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद आया।

क्या है ‘Sanctioning Russia and Iran Act’?
इस प्रस्तावित कानून का नाम ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia Act’ है। इसे 16 सितंबर को अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया था। कानून का मुख्य उद्देश्य रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग और उसके कथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाना है।

बिल में प्रावधान है कि अगर कोई देश रूसी मूल के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े आयातकों में शामिल है और कानून लागू होने के बाद जानबूझकर रूस से ऐसी नई खरीद करता है, तो उस देश से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

किन चीजों को मिलेगी छूट?
प्रस्तावित कानून में कुछ महत्वपूर्ण मानवीय और आवश्यक वस्तुओं को प्रतिबंधों से बाहर रखने की बात कही गई है। इनमें कृषि उत्पाद, भोजन, दवाएं, चिकित्सा उपकरण और मानवीय सहायता शामिल हैं। मानवीय उद्देश्यों के लिए किए जाने वाले कुछ लेन-देन पर भी ये उपाय लागू नहीं होंगे।

ट्रंप के पास रहेगा छूट देने का अधिकार
बिल राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों, पाबंदियों या अतिरिक्त टैरिफ से किसी व्यक्ति या देश को छूट देने का अधिकार भी देता है। हालांकि, इस अधिकार के इस्तेमाल के लिए कानून में कुछ शर्तें और प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।

इसका मतलब है कि कानून लागू होने के बाद भी हर मामले में एक जैसा कदम उठाना जरूरी नहीं होगा। व्हाइट हाउस को परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग मामलों में फैसला लेने की गुंजाइश रहेगी।

भारत के लिए यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति और भारत-US व्यापार वार्ता के बीच रूस से ऊर्जा खरीद का मुद्दा आगे भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है अमेरिकी टैरिफ का खतरा?
भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के जून 2026 के विश्लेषण के मुताबिक, भारत उस महीने रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था। भारत ने जून में करीब 5.5 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया था।

यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है और अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

Global Trade Research Initiative (GTRI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका टैरिफ की धमकी का इस्तेमाल भारत पर रूस से तेल की खरीद कम करने और द्विपक्षीय व्यापार समझौते में रियायतें देने के लिए दबाव बनाने के लिए कर सकता है।

भारत की तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर
GTRI के मुताबिक, टैरिफ का खतरा भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ANI के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत के कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में भी बदलाव आया है। GTRI के अनुसार, 2022 तक भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 55% से अधिक थी, जबकि रूस की हिस्सेदारी 15% से कम थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिलने वाले कच्चे तेल ने भारत के आयात बिल को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और महंगाई के दबाव को नियंत्रित रखने में मदद की है।

GTRI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब तक रूस से तेल खरीदना भारत के लिए व्यावसायिक रूप से फायदेमंद है, तब तक भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीद जारी रखने और अमेरिका के साथ बातचीत में अपने हितों की रक्षा करने पर जोर देना चाहिए।

टैरिफ का वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय निर्यात पर अमेरिकी कदम का वास्तविक असर अभी तय नहीं किया जा सकता। इसका आकलन तभी संभव होगा जब अमेरिकी सरकार यह स्पष्ट करेगी कि टैरिफ की दर कितनी होगी, किन उत्पादों पर लागू होगी और इसे कब से लागू किया जाएगा।

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में विशेषज्ञों ने भी कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंध कानून के तहत भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन अमेरिका की ओर से वास्तविक शुल्क और उसके दायरे की घोषणा के बाद ही किया जा सकेगा।

भारत ने क्या कहा?
अमेरिकी कांग्रेस में रूस से जुड़े प्रतिबंध कानून के पारित होने के बाद भारत ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा करने का संकेत दिया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर पिछले कुछ महीनों में अमेरिका के विभिन्न अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं अमेरिकी पक्ष के सामने स्पष्ट रूप से रखी हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पक्ष ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का संकल्प स्पष्ट कर दिया है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार इस घटनाक्रम के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।

इस पूरे घटनाक्रम में भारत के लिए मुख्य सवाल यह है कि रूस से ऊर्जा आयात, अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता और संभावित टैरिफ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

(एजेंसी इनपुट के साथ)