CEC Removal Process: ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?

CEC Removal Process: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने को लेकर विपक्ष एक बार फिर संसद में नोटिस देने की तैयारी में है। 25 सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दल लोकसभा और राज्यसभा में नए नोटिस पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे विशेषज्ञों से जांचने के बाद अगले सप्ताह पेश किए जाने की संभावना है। यह CEC को हटाने की दिशा में विपक्ष की तीसरी कोशिश होगी।

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वे इससे पहले 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे।

अप्रैल में 73 सांसदों ने दिया था नोटिस
इससे पहले 24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में विपक्ष के 73 सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला नोटिस दिया था। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5), अनुच्छेद 124(4), 2023 के CEC कानून और Judges (Inquiry) Act, 1968 का हवाला दिया गया था। विपक्ष ने इसमें कथित “proven misbehaviour” से जुड़े कई आरोप लगाए थे।

इससे पहले 12 मार्च 2026 को लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों ने CEC को हटाने के लिए नोटिस दिया था। इन नोटिसों में SIR समेत चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े कई आरोप लगाए गए थे।

हालांकि, 6 अप्रैल 2026 को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने इन नोटिसों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

CEC को कैसे हटाया जा सकता है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 324(5) में है। इसके तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour) या अक्षमता (incapacity) आधार होना चाहिए।

यानी किसी नोटिस का संसद में दिया जाना अपने आप में CEC को पद से हटाने का मतलब नहीं है। प्रस्ताव को निर्धारित संसदीय और जांच प्रक्रिया से गुजरना होता है।

कितने सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं?
Judges (Inquiry) Act के तहत हटाने की कार्यवाही शुरू करने वाले प्रस्ताव को:

लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों का समर्थन चाहिए। राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

मार्च 2026 के नोटिस में दोनों सदनों में आवश्यक संख्या से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर थे—लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63।

नोटिस स्वीकार होने के बाद क्या होता है?
नोटिस स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया शुरू होती है। Judges (Inquiry) Act के तहत जांच समिति बनाई जाती है, जो आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करती है।

CEC को भी अपने बचाव में पक्ष रखने का अवसर मिलता है। समिति अपनी रिपोर्ट संसद के संबंधित सदन में पेश करती है।

इसके बाद हटाने के प्रस्ताव पर संसद में विचार और मतदान होता है। प्रस्ताव को दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है—यानी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की संवैधानिक शर्त पूरी करनी होती है।

दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति CEC को पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं।

क्या भारत में किसी CEC को इस प्रक्रिया से हटाया गया है?
CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद की इस महाभियोग जैसी प्रक्रिया के जरिए पद से हटाया नहीं गया है।

ज्ञानेश कुमार के मामले में मार्च 2026 के नोटिसों को अप्रैल में स्वीकार नहीं किया गया था, जबकि अप्रैल में राज्यसभा में 73 सांसदों द्वारा एक नया नोटिस दिया गया था। अब सितंबर 2026 में विपक्ष की ओर से एक और नए नोटिस की तैयारी की रिपोर्ट सामने आई है।

चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?
CEC को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया का बचाव किया है। आयोग का कहना रहा है कि किसी संवैधानिक संस्था में अलग-अलग अधिकारियों के बीच विचार या टिप्पणियों में अंतर होना निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

इस पूरे मामले में विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं; इसलिए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखना जरूरी है।

फिलहाल स्थिति
25 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष नए नोटिस लोकसभा और राज्यसभा में पेश करने की तैयारी में है। यदि नोटिस पेश और स्वीकार होता है, तभी आगे की निर्धारित जांच एवं संसदीय प्रक्रिया का सवाल आएगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)