कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में स्थित है प्रसिद्ध पंचमुखी गणेश मंदिर (Panchmukhi Ganesh Temple)। यहां पर भगवान गणेश पंचमुखी अवतार में विराजमान है। इसलिए इस मंदिर को पंचमुखी गणेश मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर देश के अन्य गणेश मंदिरों से काफी अलग है।
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तमिलनाडु के तंजावुर शहर में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर (Brihadeeswarar Temple) है। एक हजार वर्ष पुराने बृहदेश्वर मंदिर को UNESCO World Heritage Site लिस्ट में विश्व धरोहर घोषित किया है। यह दुनिया में पहला और एकमात्र ऐसा मंदिर है जो पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थरों से बना हुआ है।
जगत के पालनहार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) सृष्टि को रक्षा करने के लिए कई बार धर्म और मर्यादा का भी उल्लंघन करना पड़ा, यहां तक कि इन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) को धोखा और एक स्त्री के साथ छल से संबंध भी बनाने पड़े। जानिए ऐसी घटनाएं, जिनमें सृष्टि के कल्याण के लिए उन्होंने छल का सहारा लिया।
आस्था व परंपरा की परिपाटी से जुड़े छपरा (Chhapra) जिले के मशरख प्रखण्ड के अरना पंचायत मे घोघारी नदी के तट पर विगत डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से कार्तिक पूर्णिमा के दूसरे दिन लगने वाला बड़वाघाट मेला आधुनिकता की चकाचौंध के बाद भी अपनी पुरातन पहचान को कायम रखे हुए है जनश्रुतियों के अनुसार वनवास के दौरान भगवान राम ने यहां प्रवास किया था।
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह किया जाता है। इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) के दिन ही भगवान विष्णु चार महीने बाद योगनिद्रा से जागते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीहरि योग निद्रा से जागने के बाद सर्वप्रथम हरिवल्लभा यानी माता तुलसी की पुकार सुनते हैं। तुलसी विवाह के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाते हैं।
हिन्दू संस्कृति में ऐसे तो सभी पर्व और त्योहार मनाने की अलग-अलग परंपरा है, लेकिन बिहार और झारखंड में भैयादूज...
हनुमान चालीसा में जिक्र है कि अगर आप बहुत अधिक संकट में हैं तो 8 मंगलवार हनुमान जी के दर्शन कर ले तो आपके सारे संकट दूर हो जाएंगे। जोधपुर के एक प्राचीन पंचमुखी हनुमान मंदिर हैं। इस मंदिर की विशालकाय प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह स्वयंभू हैं और पंचमुखी हनुमान (Swayambhu Panchmukhi Hanuman) जी के दर पर जो भी मत्था टेक ले उसके सभी कष्ट व पीड़ा हनुमान जी हर लेते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु साल के सालों भी आते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहता है।
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shanidev) को कर्मफल दाता कहा जाता है। वहीं लाल किताब में शनि को पापी ग्रह का दर्जा दिया गया है। राहु और केतु इसके सेवक हैं। यह तीनों ग्रह एक साथ मिलकर कुंडली में खतरनाक स्थिति बनाते हैं। कुंडली में शनि शुभ योग में हो तो जातक को शुभ फल मिलते हैं।
बिहार (Bihar) का ऐतिहासिक सोनपुर (Sonpur) मेला आज भी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कहने को तो यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है लेकिन यहां आने वाले सैलानियों का आकर्षण नौटकी कंपनियों की बालाएं भी होती हैं। आने वाले इन बालाओं के मनमोहक नृत्य एवं शोख अदाओं के आज भी मुरीद हैं।
हर जिले के मद्यनिषेध कार्यालयों में खुलेगा आधार प्रमाणीकरण केंद्र
इस मंदिर में मां जागृत अवस्था में विराजमान है। माँ के दर्शन के लिए लिए टिकारी शहर, इसके आस पास के गावँ के तथा टिकारी से बाहर रहने वाले लोग भी आते रहते हैं।
विदेशी फंडिंग के आरोप में केंद्रीय गृह मंत्रालय की कार्रवाई, सोनिया गांधी हैं RGF की अध्यक्ष, चीन से चंदे पर मचा था हंगामा









