ऐसी महिलाएं जिन्होंने अपने पति के रूप में जीवन की आशा भी छोड़ दी थी, उनके लिए सक्षम योजना एक वरदान साबित हो रही है, जिसका जीवित उदाहरण पेश करती ओड़गी विकासखण्ड की महेश्वरी आज सक्षम योजना का लाभ पाकर अपने घरेलू जीवन को सुख और संतोष से व्यतीत कर रही है।
छायाचित्र प्रदर्शनी में मासिक पत्रिका जनमन एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी वाले पॉम्पलेट, आदिवासी हित सबसे आगे पाकेट बुक का निःशुल्क वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आज विकासखण्ड मुख्यालय नगरी के शीतला माता मंदिर परिसर में महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में 22 जोड़े वर-वधुओं का विवाह वैदिक रीति-रिवाज से सम्पन्न हुआ।
स्वसहायता समूहों की महिलाएं बने उद्यमी भी, खेत में सरसों हो रहा था अब सरसों तेल की पेराई मशीन आ जाने से सीधे तेल बेचकर कमा रही बड़ा मुनाफा
कृषक ने बताया कि पूर्व में धनिया को 40 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खुले बाजार में विक्रय करते थे किन्तु अब उद्यानिकी विभाग से अनुदान पर पल्वराईजर मशीन मिलने के बाद हल्दी, मिर्ची, धनिया की पिसाई कर दोगुने-तीगुने राशि पर विक्रय कर लाभ अर्जित किया जा रहा है। जिनसे उनके आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।
सुखाड़ नाला पर पुल के बन जाने से मरवाही से पसान (कोरबा) की दूरी 10 किलोमीटर कम हो गई है। पहले लोगों को मरवाही से कोटमी होते हुए पसान जाना पड़ता था, जिसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। अब सीधे मरवाही से सेमरदर्री होते हुए पसान जाने की सुविधा उपलब्ध हो गयी है।
विभाग द्वारा लगाई गई छायाचित्र प्रदर्शनी एवं एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं का अतिथियों द्वारा अवलोकन किया गया साथ ही आये हुए कलाकारों द्वारा पारम्परिक वेशभूषा में लोक गीत नृत्य के प्रदर्शन का आयोजन का लुत्फ लिया।
बेमेतरा: शिशु संरक्षण माह कार्यक्रम का शुभारंभ कल कलेक्टर विलास भोसकर संदीपान द्वारा बेमेतरा के वार्ड नम्बर 2 विद्यानगर मे...
बच्चों के कुपोषण स्तर में लगातार आ रही गिरावट, प्रदेश में एक लाख 70 हजार बच्चे हुए कुपोषण मुक्त, छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत से भी कम
कलेक्टर के हाथों लैपटाप मिलने से सपने पूरे होने की खुशी चेहरे पर झलकी, विमल ने खुशी होकर दिया धन्यवाद
सौर सुजला योजना से किसानों की पैदावार में बढ़ोत्तरी हो रही है और उनकी आय भी बढ़ रही है। इस योजना से कृषक काफी लाभान्वित हुए हैं एवं अनुसूचित क्षेत्र के बाहुल्य ग्रामों के ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में महुआ से लड्डू, चाय, जैम, जेली और कुकीज जैसे विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे हैं।
