
लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इज़राइल के सैन्य अभियान को लेकर एक नया दावा सामने आया है। द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल को हिज़्बुल्लाह के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर उसे पूरी तरह खत्म करने से रोका था।
उनका दावा है कि अमेरिकी दबाव के चलते इज़राइल को अपनी सैन्य रणनीति और ऑपरेशनल योजनाओं में बदलाव करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, काट्ज़ ने कहा कि संघर्ष के दौरान अमेरिका और इज़राइल के बीच करीबी साझेदारी होने के बावजूद उसकी कुछ सीमाएं थीं। द न्यूयॉर्क पोस्ट द्वारा प्राप्त ब्रीफिंग के अनुवादित ट्रांसक्रिप्ट के हवाले से उन्होंने कहा, “अमेरिका के साथ साझेदारी की कुछ सीमाएं होती हैं।”
‘नेतन्याहू ने दबाव के बावजूद दृढ़ नेतृत्व दिखाया’
काट्ज़ ने कहा कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैन्य अभियानों को कम करने के अमेरिकी अनुरोधों को बार-बार ठुकराया।
न्यूज़ आउटलेट के अनुसार, काट्ज़ ने कहा कि ट्रंप की चार फोन कॉल्स के ज़रिए की गई इन मांगों के बावजूद कि इज़राइली रक्षा बल लेबनान छोड़ दें, “नेतन्याहू बहादुरी से डटे रहे।”
‘ईरान ने अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की’
काट्ज़ ने आरोप लगाया कि ईरान ने वाशिंगटन को इज़राइल पर अपना हमला रोकने के लिए दबाव डालने के लिए उकसाया।
खबरों के मुताबिक काट्ज़ ने कहा, “ईरान ने इसे रोकने के लिए इज़राइल पर दबाव डालने के वास्ते लगातार अमेरिका पर दबाव बनाया। मैं आपको याद दिला दूं कि उस समय हम पूरे लेबनान पर हमला कर रहे थे।”
उन्होंने आगे दावा किया कि जैसे-जैसे इज़राइली अभियान तेज़ हुए, हिज़्बुल्लाह ने ईरान से दखल देने की मांग की।
काट्ज़ ने कहा, “हिज़्बुल्लाह… घबराहट में ईरान पर दबाव डाल रहा था कि वह अलग-अलग मोर्चों को आपस में जोड़ दे।” उनका इशारा लेबनान के मोर्चे को अमेरिका-ईरान युद्धविराम से जोड़ने की ओर था।
बेरुत एयरस्ट्राइक को लेकर अमेरिका-इज़राइल में मतभेद
काट्ज़ के अनुसार, नेतन्याहू आखिरकार बेरुत में इमारतों को निशाना न बनाने पर सहमत हो गए; रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस फैसले का विरोध किया था।
काट्ज़ ने कहा कि नेतन्याहू बेरुत में “इमारतें न गिराने” पर सहमत हुए, लेकिन “सर्जिकल हमले” जारी रखने पर ज़ोर दिया।
काट्ज़ का दावा: ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से पहले बातचीत को दी प्राथमिकता
काट्ज़ ने संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत की संभावनाओं को बनाए रखने के ट्रंप के प्रयास ने लेबनान पर अमेरिका के रुख को प्रभावित किया।
न्यूज़ आउटलेट ने काट्ज़ के हवाले से कहा, “मुझे उस संबंध [युद्धविराम के लेबनान तक विस्तार] के लिए खेद है, लेकिन यह अमेरिका के हित में था कि [ट्रंप] वास्तव में ईरान के साथ बातचीत की संभावना को आगे बढ़ाना चाहते थे, और वह इसे उसमें एक बाधा के रूप में देख रहे थे।”
खबरों के मुताबिक काट्ज़ ने कहा कि बाद में रणनीति बदलकर इज़राइली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान में बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया; इस पर इज़राइल और लेबनान पिछले हफ़्ते सहमत हुए थे कि हिज़्बुल्लाह की हार तक इज़राइली सेना वहां बनी रह सकती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
