मध्यप्रदेश के देवास के ग्राम नागदा में एक अति प्राचीन श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर (Siddhi Vinayak Ganesh Mandir) है। महाभारत कालीन इस मंदिर के बारे में बताया जाता है ये करीबन 5000 साल से भी अधिक पुराना है।
वृक्ष सदा उपकार की खातिर जीते है। इसलिये हम वृक्षों के कृतज्ञ है। वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु परिवार के प्रति व्यक्ति को हरियाली अमावस्या पर एक-एक पौधारोपण करना चाहिये।
बांदरपूंछ के पश्चिमी छोर के एक संकरे स्थान पर पवित्र यमुनाजी का मंदिर (Yamunaji ka Mandir) है। परंपरागत रूप से यमुनोत्री (Yamnotri) चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) का पहला पड़ाव है।
जनक के शासनकाल में एक व्यक्ति का विवाह हुआ। जब वह पहली बार सज-संवरकर ससुराल के लिए चला, तो रास्ते...
यह मंदिर आस्था केंद्र होने के साथ-साथ अपनी अनूठी वास्तुकला और जटिल शिल्पकला के लिए भी जाना जाता है, जो इसके आकर्षण में चार चाँद लगाने का कार्य करती है।
श्रीलंका में स्थित कोनेश्वरम मंदिर (Koneshwaram Temple) एक प्राचीन हिंदू शिव मंदिर (Hindu Shiv Mandir) है।
इस कलयुग में हिंदुओं में सबसे अधिक हनुमान जी (Hanuman ji) को पूजा जाता है। भगवान राम के आशीर्वाद से हनुमान जी को कलयुग का जीवित देवता माना जाता है।
भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करने का सबसे उत्तम महीना होता है सावन (Sawan) लेकिन क्या जानते हैं कि सावन के महीने का इतना महत्व क्यों है और भगवान शिव को यह महीना क्यों प्रिय है? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में।
तिरुनलार सनीश्वरन मंदिर (Tirunallar Saneeswaran Temple) या धरबरनीश्वर मंदिर (Dharbarneeshwar Temple) भारत के पांडिचेरी के कराईकल जिले में भगवान शनि (Shanidev) को समर्पित मंदिरों में से एक है।
पिछले दिनों भगवान राम (Lord Rama) की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया गया है कि 21 साल की उम्र में भगवान राम ऐसे दिखते थे। यह तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) ने बनाई है।
मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा और सेवा करने वालों को वह कभी निराश नहीं करते और हर संकट से उन्हें बचाने स्वंय दौड़े चले आते हैं। यही वजह है कि मंगलवार व्रत का विशेष महत्व है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार युद्ध में राजा दशरथ (Raja Dashrath) का मुकाबला बाली से हो गया। राजा दशरथ की तीनों रानियों में से कैकयी अस्त्र-शस्त्र और रथ चालन में पारंगत थीं।











