पौराणिक मान्यताओं अनुसार प्रभु ने त्रेता में श्री राम के रूप में अवतार लेकर बाली को छुपकर तीर मारा था। कृष्णावतार के समय भगवान ने उसी बाली को जरा नामक बहेलिया बनाया और अपने लिए वैसी ही मृत्यु चुनी, जैसी बाली को दी थी।
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शिवपुराण (Shivpuran) के अनुसार, एक बार एक महादैत्य हुआ जिसका नाम था तारकासुर। इन दैत्य के तीन पुत्र हुए जिनके नाम तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली था। शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया।
शास्त्रों में कुछ देवी-देवताओं की मूर्तियां या फोटो को घर पर रखना वर्जित माना गया है। इन्हीं में से एक शनिदेव की मूर्ति भी है।
एक बार देवर्षि नारद विष्णु भगवान (Lord Vishnu) से मिलने गए। भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया। लेकिन जब नारद जी वापिस गए, तो विष्णुजी ने कहा- हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे, उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो।
विभीषण ने हनुमानजी की स्तुति में एक बहुत ही अद्भुत और अचूक स्तोत्र की रचना की है। विभीषण द्वारा रचित इस स्तोत्र को 'हनुमान वडवानल स्तोत्र' कहते हैं।
इस मंदिर को गणपतिपुले मंदिर (Ganpatipule temple) के नाम से जाना जाता है और यह मंदिर रत्नागिरि जिले में स्थित है। मंदिर आश्चर्यजनक रूप से 400 साल पुराना है।
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) हिंदू कैलेंडर में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है।
हिन्दू धर्म में पंचदेव की पूजा रोज करनी चाहिए। इनमें गणेशजी, शिवजी, विष्णुजी, मां दुर्गा और सूर्यदेव शामिल हैं। रोज सुबह सूर्यदेव (Suryadev) के दर्शन करने से कुंडली के सूर्य और अन्य ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं। सूर्य साक्षात दिखाई देने वाले भगवान माने जाते हैं।
यह कराची में उन हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है, जो भारत में गंगा या सिंधु के किनारे की यात्रा नहीं कर सकते।
विघ्नों के नाशक माने जाने वाले भगवान गणेश (Lord Ganesha) ने कभी तुलसी के प्रेम को अस्वीकार कर दिया था और नाराज होकर उसे शाप भी दिया था। फिर गणेश जी ने भी तुलसी को शाप दिया।
सदियों से मौसम की मार झेल रहा यह मंदिर आज भी खड़ा है। पांडवों के बाद आज से लगभग 1000 वर्ष पहले 1060 ईं में राजा मांबाणि ने इस मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार करवाया।












