भगवान गणपति की विशाल मूर्ति की स्थापना के लिए पहले इस जमीन पर एक इंटरनेशनल पार्क बनाया गया है। इसे सिटी ऑफ गणेश (City of Ganesh) के नाम से पुकारा जाता है। इस मूर्ति के निर्माण में (2008-2012) पूरे चार साल का समय लगा।
हिंदू पौराणिक कथाओं में, भगवान राम (Lord Rama) को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का अवतार माना जाता है और वे अपने विभिन्न कौशल और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं।
शास्त्रों में सबसे ऊपर सूर्य देव का स्थान माना गया है। अगर सूर्य देव की पूजा की जाए तो कहा जाता है कि व्यक्ति के हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। सूर्य देव के कई नाम हैं। इन सभी नामों का महत्व अलग है।
महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nasik) के वणी गांव में सप्तश्रृंगी मंदिर (Saptashringi Temple) स्थित है। मान्यतानुसार, महाराष्ट्र में देवी के साढ़े तीन शक्तिपीठ (Shaktipeeth) में से अर्धशक्तिपीठ (Ardhashaktipeeth) वाली सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं।
कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के कोप्पा में प्राचीन ‘कमंडल गणपति मंदिर’ (Kamandal Ganapati Temple) स्थित है। इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा के ठीक सामने एक जल स्रोत का उद्गम स्थल है। ये उद्गम स्थल ब्राह्मी नदी का है।
श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर, विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर है। लगभग 24 एकड़ क्षेत्रफल में अपने विस्तार के कारण यह भारत का आठवाँ सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है।
हनुमानजी (Hanuman ji) रावण (Ravan) की स्वर्ण नगरी लंका को जला कर राख करके चले जाते हैं और रावण उनका कुछ नहीं कर सका। वह सोचते-सोचते परेशान हो जाता है कि आखिर उस हनुमान में इतनी शक्ति आई कहां से?
भगवान शिव (Lord Shiva) नटराज के रूप में संगीत कला के सर्जक व संरक्षक माने जाते हैं। डमरु (Damru) उनका विशेष वाद्ययंत्र है। 'डमरु' शब्द सुनते ही जो पहली तस्वीर आंखों के सामने आती है, वह है डमरु बजा कर नृत्य करते हुए भगवान शिव की।
शनि देव (Shani Dev) अच्छे कर्म करने वालों के लिए जितने कृपालु हैं, तो वहीं बुरे कर्म करने वालों के लिए उतने ही दंडाधिकारी हैं। रुष्ट हों तो शनि आर्थिक कष्ट देते हैं। जब शनि कुंडली के नीच भाव में हो तो धन हानि होती है।
कंस को मारने के बाद भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) कारागृह में गए और वहां से माता देवकी तथा पिता...
कलयुग में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले हनुमान जी के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र हैं, जिनमें पहले स्थान पर उनका गदा आता है। आइये जानते हैं हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुआ और इसकी विशेषताएं क्या हैं?
शनिदेव व्यक्ति को माया, मोह, असत्य, इन्द्रियजन्य सुख, विषय-वासना की आसक्ति से हटाकर परमतत्व का ज्ञान कराते हैं। साथ ही अच्छे-बुरे की पहचान भगवान शनिदेव द्वारा ही होती है। स्वार्थ की धुरी पर चलने वाली इस सृष्टि में व्यक्ति को परमात्मा की ओर मोड़ने वाले एक मात्र भगवान शनिदेव ही हैं। भगवान शनिदेव मानव को विभन्न प्रकार की कष्टाग्नि में तपाकर कुंदन बनाते हैं तथा समय के अनुसार चलना सिखाते हैं।












