विनायक, गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी (Ganesh ji) जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।
हमारे देश में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा...
शनि एक धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। पुराणों में यह कहा गया है कि शनिदेव (Shanidev) लंगड़ाकर चलते हैं, जिस कारण उनकी गति धीमी है। उन्हें एक राशि को पार करने में लगभग ढाई वर्ष का समय लगता है। शनिदेव लंगड़ाकर क्यों चलते हैं? इस पर शास्त्रों में दो कथाएं प्रचलित हैं।
भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी व चंद्रदेव की पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि
देश के अलग-अलग भागों में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) में से सबसे खास है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga)। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) में से एक कहा गया है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन, आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। वे भगवान शिव की कृपा के पात्र बनते हैं। यह परम पवित्र ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में भीमाशंकर का स्थान छठा है। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 110 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे कुंभकर्ण के पुत्र भीम की एक कथा प्रसिद्ध है।
शास्त्रों में सबसे ऊपर सूर्य देव का स्थान माना गया है। अगर सूर्य देव की पूजा की जाए तो कहा जाता है कि व्यक्ति के हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। सूर्य देव के कई नाम हैं। इन सभी नामों का महत्व अलग है।
भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के दशावतारों में से एक वामन अवतार (Vaman Avatar) का दुर्लभ मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर...
देशभर में हनुमान जी (Hanuman ji) के कई चमत्कारी मंदिर है। इन मंदिरों में कहीं बजरंगबली (Bajrangbali) लेटे हुए, कहीं बैठे हुए तो कहीं उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा देखी होगी। लेकिन गुजरात के द्वारका में हनुमान जी का एक अनोखा ही मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। जी हां आपको जानकर आश्चर्य जरुर हुआ होगा, क्योंकि हनुमान जी तो बालब्रह्मचारी थे। जानिए, इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
बहुत कम लोग भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे अवतार के बारे में जानते होंगे जिन्होंने शनिदेव (Shanidev) पर प्रहार किया था। उसकी के कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के एक दिन बाद तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार द्वादशी तिथि 24 नवंबर 2023 दिन शुक्रवार को पड़ रही है
भोजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूर पर स्थित बिहिया में स्थापित है लोक आस्था की प्रतीक प्रसिद्ध महथिन माई मंदिर (Mahathin Mai Mandir)। महथिन माई के प्रति लोगों की गहरी आस्था है।








