झारखंड की राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर रजरप्पा में छिन्नमस्तिका देवी (Chinnamastika Devi) का मंदिर स्थित है। ये मंदिर शक्तिपीठ के रूप में काफी विख्यात है।
बिहार की राजधानी पटना के हृदयस्थली अवस्थित उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर (Mahavir Mandir) में राम नवमी (Ram Navami) के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।
नवरात्रि उत्सव में अष्टमी और नवमी दो महत्वपूर्ण दिन हैं, जो नौ दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। ये दिन हिंदू पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण महत्व रखते हैं और बड़ी भक्ति और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
इस हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) को हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi) के नाम से जाना जाता है। नैनीताल के अतिरिक्त भारत के अन्य प्रदेशों में भी हनुमान गढ़ी के नाम से कई मंदिर प्रसिद्ध हैं।
बिहार के औरंगाबाद (Aurangabad) जिला मुख्यालय से से 18 किलोमीटर दूर स्थित देव सूर्य मंदिर (Dev Surya Mandir) करीब एक सौ फीट ऊंचा है। यहां संस्कृति के प्रतीक सूर्यकुंड को गवाह मानकर व्रती जब छठ मैया और सूर्यदेव की आराधना करते हैं, तो उनकी भक्ति देखते ही बनती है। छठ मेले में यहां जाति, संप्रदाय एवं शास्त्रीय कर्मकांड के बंधन समाप्त हो जाते हैं।
शनि देव के पैर में खराबी का गवाह है अक्षयपुरीश्वर मंदिर
भगवान राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी को भी नवरात्रि से जोड़कर देखी जाती है। कहते हैं कि जिस वक्त श्री राम सीता को रावण से छुड़ाने के लिए युद्ध लड़ रहे थे। उस समय रावण पर विजय पाने के लिए भगवान श्री राम ने देवी दुर्गा का अनुष्ठान किया था, जो पूरे 9 दिनों तक चला था।
इस वर्ष रामनवमी के पर्व पर एक साथ कई तरह का दुर्लभ संयोग बन रहा है। राम नवमी पर अमृत सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, शुभ योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। इसके अलावा रामनवमी गुरुवार के दिन पड़ने से इसका महत्व काफी और भी बढ़ गया है।
जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित मंदिर में गणेश जी के बाल रूप की प्रतिमा स्थापित है। गणेश जी के बाल रूप को देखकर यहां आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है। बिना सूंड़ वाले गणेश जी को देखकर लोग चकित भी हो जाते हैं।
यह मंदिर उड़ीसा (Odisha) के टिटलागढ़ (Titlagarh) में मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के दरवाजे बंद कर देने पर इस मंदिर के अंदर बहुत अधिक ठंडक बढ़ जाती है।
सूर्यदेव भगवान् विष्णु को गुरु मानकर उनके उत्तर भाग में आज भी स्थित हैं इसलिए वे केशवादित्य के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे काशी में अपने भक्त के अज्ञानमय अंधकार को दूर करते हैं और उनसे प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित सिद्धि देते हैं।
जब भगवान शिव देवी सती की मृत्यु के बाद उन्हें कैलाश पर्वत ले जा रहे थे तो उनकी एक आंख नैनीताल में गिर पड़ी थी, जबकि दूसरी आंख हिमाचल के बिलासपुर में गिरी थीं। यही कारण है कि देवी का ये मंदिर शक्तिपीठ में शामिल हैं।












