कुण्डली में सूर्य कमजोर होने से मान-प्रतिष्ठा और किए गए कार्यों का श्रेय नहीं मिल पाता है। इसके अलावा रोग भी परेशान करते है। कुण्डली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन सूर्यदेव पूजन (Suryadev Pujan) जरूर करें।
उर्मिला के विषय में उसकी निद्रा बड़ी प्रसिद्ध है जिसे "उर्मिला निद्रा" (Urmila Nidra) कहा जाता है। अपने 14 वर्ष के वनवास में लक्ष्मण एक रात्रि के लिए भी नहीं सोये।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश (Lord Ganesha) जी का सिर हाथी का और एक दांत टूटे होने के कारण...
सूर्यदेव की इस पुत्री से विवाह करने खुद पहुंचे थे श्री कृष्ण
आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) व्रत आज 3 मार्च को है। होली (Holi) से पहले आमलकी एकादशी का विशेष महत्व है। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा के साथ शंकर-पार्वती के साथ होली खेलने की परंपरा है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
वरदविनायक मंदिर (Varadvinayak Temple) भगवान गणेशजी (Lord Ganesha) के अष्टविनायको (Ashtavinayak) में से एक है। यह मंदिर भारत में महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के कर्जत और खोपोली के पास खालापुर तालुका के महड गाँव में स्थित है।
कहते हैं कि महाप्रतापी राक्षस रावण ने कामना की कि उसका पुत्र अजेय हो तथा उसकी मृत्यु न हो। वह...
भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) भारत और दुनिया भर में भक्तों द्वारा पूजे जाने वाले एक हिंदू देवता हैं। भगवान जगन्नाथ का मंदिर ओडिशा के पुरी शहर में स्थित है। यहां भगवान के साथ उनके भाई बलभद्र (Balarama) और बहन सुभद्रा (Subhadra) की भी पूजा की जाती है।
अयोध्या (Ayodhya) राम नगरी (Ram Nagri) के रूप में जाना जाता है, लेकिन अयोध्या की राम की पैड़ी खेत्र में स्थित प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर (Nageshwar Nath Mandir) भी है, जो पूरे देश में रहने वालों शिव भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।
शनि एक धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। पुराणों में यह कहा गया है कि शनिदेव (Shanidev) लंगड़ाकर चलते हैं, जिस कारण उनकी गति धीमी है। उन्हें एक राशि को पार करने में लगभग ढाई वर्ष का समय लगता है। शनिदेव लंगड़ाकर क्यों चलते हैं? इस पर शास्त्रों में दो कथाएं प्रचलित हैं।
सबसे पहले हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित एक रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी।












