शेषनाग की हुंकार से आज भी खौलता है यहाँ का पानी
शनिवार का दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन किए जाते हैं। शनिवार को कौन सा कार्य करना चाहिए व कौन सा नहीं, इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जिससे अनजाने में भी शनिदेव का कुप्रभाव न पड़े।
गोवर्धन लीला (Govardhan Leela) के बाद समस्त ब्रजमंडल (Brajmandal) में श्री कृष्ण (Shri Krishna) के नाम की चर्चा होने लगी। सभी ब्रजवासी (Brajvasi) कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी।
हर किसी को मालूम है कि गणेश जी (Ganesh ji) को मोदक और मिठाई कितनी पसंद है। शायद इसलिए वो किसी के भी निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं और मन भर कर मोदक और मिठाई खाते हैं।
अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि, गृह क्लेश, ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, सजा का भय, प्रॉपर्टी विवाद, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसे स्थितियों में भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप इन सभी समस्याओं से मुक्ति के लिए किया जाता है।
इस वर्ष हर हिंदू त्योहार की तरह महाशिवरात्रि (Mahashivratri) की तिथि को लेकर भी लोगों के बीच संशय है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2023 में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 फरवरी को रात 8 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 19 फरवरी को 4 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी।
भारत में उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर ऐसे तो विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) की पवित्र देवभूमि में भी भगवान सूर्यदेव साक्षात विराजते हैं कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) के रूप में।
भारत में कई ऐसे स्थान हैं, जिनका नामकरण वहां के कुल देवता या देवी के नाम पर हुआ है। बिहार (Bihar) के भोजपुर (Bhojpur) जिले का मुख्यालय आरा भी एक ऐसा ही शहर है, जिसका नामकरण अरण्य देवी (Aranya Devi) के नाम पर हुआ है। यहां के लोग इन्हें आरन देवी (Aaran Devi) भी कहते हैं।
जगतपिता ब्रह्मा (Jagatapita Brahma) के मन में बाल कृष्ण (Bal Krishna) की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने कुछ ऐसा...
जो भी वस्तु इस बरमूडा त्रिभुज के पास जाता है, उसका नामोनिशान तक नहीं मिलता। वहीं, माना जाता है कि इस रहस्यमय बरमूडा त्रिभुज का संबंध भगवान हनुमान जी (Hanuman ji) के साथ है।
वेद, आयुर्वेद, ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्रों में है सूर्य का महत्त्व
शिवशंकर महादेव की महिमा अनुपम है। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का विशेष पर्व श्रद्धालुओं में असीम श्रद्धा लेकर आता है। इस दिन कहा जाता है कि भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह संपन्न हुआ था। इसके दूसरे दिन आने वाली अमावस्या को विवाह पश्चात की विशेष रात्रि के रूप में मनाया जाता है।












