महाशिवरात्रि के दिन शिवतत्त्व नित्य की तुलना में 1000 गुना अधिक कार्यरत रहता है। शिवतत्त्व का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की भावपूर्ण रीति से पूजा-अर्चना करने के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ यह नामजप अधिकाधिक करना चाहिए।’
भगवान विष्णु को उनके भक्त सदायोगी मुद्रा में दर्शन करना पसंद करते हैं। क्योंकि यही सबसे सक्रिय अवस्था है लेकिन भगवान विष्णु की दूसरी सबसे प्रचलित मुद्रा में भगवान खड़े हुए दिखाई देते हैं।
शनिदेव ने कोकिलावन धाम में तपस्या की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कोयल के रूप में वहां दर्शन दिए। साथ ही शनिदेव से कहा कि वे अब यहीं ठहर जाएं। अपने आराध्य की आज्ञा मानते हुए शनि वहीं विराजमान हो गए।
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए हैं। उनमें से वृषभ अवतार भगवान शिव ने एक बैल...
भगवान श्री गणेश का ये मंदिर भारत के दक्षिणी प्रांत आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। इसका निर्माण चोल वंश ने 11 शताब्दी में करवाया था। इसके बाद विजयनगर के शासकों ने वर्ष 1336 में इसका विस्तार किया। मंदिर के बनने की कहानी भी बेहद रोचक है।
देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है। यहां मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दोबारा गर्भधारण नहीं करना होता है। भगवान शिव खुद यहां तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं। अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता।
व्रत, रात्रि- जागरण, शिव-पूजन (निशीथकाल: रात्रि 12:26 से 1:15 तक) पहर- प्रथम शाम 6:43 से, द्वितीय: रात्रि 9:43 से, तृतीय: मध्य रात्रि 12:51 से, चतुर्थ 2 मार्च प्रातः 3:55 से)
इस मंदिर को श्रीपुरम महालक्ष्मी के नाम से जाना जाता है। पूरा मंदिर शुद्ध सोने से निर्मित है और इसमें लगभग 15000 किलोग्राम शुद्ध सोने का प्रयोग हुआ है।साउथ का गोल्डन टेंपल कहलाने वाला यह मंदिर लगभग 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। रात को रोशनी में जगमगाते इस मंदिर को देखना अद्भुत होता है।
पुराणों से पता चलता है कि शिव और महेश दोनों अलग-अलग सत्ताएं थीं। शिव के जिस निराकार रूप की चर्चा की जाती है दरअसल वे पार्वती के पति नहीं है, वे तो परब्रह्म सदाशिव हैं। शंकर को ही महेश कहा गया है। भगवान शिव की चार पत्नियां थीं। आज जानिए उनके बारे में।
आज हमारे चारों ओर का वातावरण अत्यंत दूषित हो गया है। जब हम प्रदूषण की बात करते हैं, तो सामान्यतः हम वायु...
हिंदू धर्म में इंसान का वर्तमान उसके पिछले कर्मो पर और भविष्य वर्तमान कर्मों पर आधारित होता है। लेकिन यह...
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