बाल्यकाल में जब हनुमान सूर्यदेव (Suryadev) को फल समझकर खाने को दौड़े तो घबराकर देवराज इंद्र (Devraj Indra) ने हनुमानजी...
अनमोल कुमार भगवान विष्णु की पूजा से बृहस्पति ग्रह भी शांत होता है, जिससे व्यक्ति के विवाह में आने वाली...
रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी। स्थानीय लोग इसे भूतों वाला मंदिर भी कहते हैं।
वैसे तो देवाधिदेव शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन संगम के नजदीक अरैल स्थित शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर सूर्यदेव से संबंधित है। शिवपुराण और स्कन्द पुराण में इस मंदिर का वर्णन शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से किया गया है। सबसे खास बात यह है इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव के साथ ही सूर्यदेव भी प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
यह मंदिर आस्था केंद्र होने के साथ-साथ अपनी अनूठी वास्तुकला और जटिल शिल्पकला के लिए भी जाना जाता है, जो इसके आकर्षण में चार चाँद लगाने का कार्य करती है।
भगवान शिव (Lord Shiva) के मस्तक पर गंगा के विराजमान होने की घटना का संबंध राजा भगीरथ से माना जाता है। कथा है कि भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। लेकिन इस कथा के पीछे कई कथाएं हैं जिनसे भगीरथ का प्रयास सफल हुआ।
सूर्य पुत्र शनिदेव (Shanidev) को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं कि वह गुस्सैल, भावहीन और निर्दयी हैं।...
शनिवार के दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा करने का विधान है। शनिदेव की पूजा करते समय इन मंत्रों का पाठ किया जाए तो शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जिन लोगों पर साढ़ेसाती चल रही होती है वह भी सही हो जाता है।
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन (Solan) स्थित जटोली शिव मंदिर ((Jatoli Shiva Mandir) भगवान शिव (Lord Shiva) के सबसे...
उज्जैन (Ujjain) से करीब 6 किलोमीटर दूर श्री चिंताहरण गणेश मंदिर (Shri Chintaharan Ganesh Temple) में भगवान श्री गणेश के तीन रूप एक साथ विराजमान है। जो चितांमण गणेश, इच्छामण गणेश और सिद्धिविनायक के रूप में जाने जाते है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।




