भगवान शिव (Lord Shiva) के मस्तक पर गंगा के विराजमान होने की घटना का संबंध राजा भगीरथ से माना जाता है। कथा है कि भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। लेकिन इस कथा के पीछे कई कथाएं हैं जिनसे भगीरथ का प्रयास सफल हुआ।
इस कलयुग में हिंदुओं में सबसे अधिक हनुमान जी (Hanuman ji) को पूजा जाता है। भगवान राम के आशीर्वाद से हनुमान जी को कलयुग का जीवित देवता माना जाता है।
भारत में अनेक प्राचीन मंदिर है और हर मंदिर की एक चमत्कारिक कथा हैं। इन मंदिरों का जिक्र ग्रंथों में भी मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के अलनगुड़ी में स्थित है। इस मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस पावन स्थान पर देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की अराधना करके नवग्रहों में प्रथम स्थान का आशीर्वाद पाया था।
कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) देश का प्राचीनतम सूर्य मंदिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य में अल्मोड़ा (Almora) जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसकी विशेषता है कि यहां पर सूर्य देव की मूर्ति किसी धातु या पत्थर से निर्मित नहीं, बल्कि एक बड़ के पेड़ की लकड़ी से बनी है। यह अपने आप में अद्भुत व अनोखी है। इस सूर्य मंदिर को “बड़ आदित्य मंदिर” (Aditya Mandir) भी कहा जाता है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इन्हीं में से एक मंदिर गोलू देवता (Golu Devta Mandir) का भी है। गोलू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है।
इंदौर के हृदय स्थल राजवाड़ा में एक ऐसा प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर है, जहां दीपावली के अवसर पर लाखों भक्तों की भीड़ अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए पूजा-अर्चना करती है। यहां महालक्ष्मी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।
हिंदू धर्म में कोई भी पूजा पाठ या शुभ काम बिना गणेश भगवान (Ganesh Bhagwan) की पूजा कर या आरती...
माता आदिशक्ति के 51 पीठों की तरह ही कोल्हापुर में 27 हजार वर्गफुट में फैला माता महालक्ष्मी (Mahalakshmi) का शक्तिपीठ विश्व प्रसिद्ध है। 2000 साल पुराने इस मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है।
गोरखपुर (Gorakhpur) शहर के मेडिकल कॉलेज रोड पर भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) का एक प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर की खास...
इस मंदिर में मां जागृत अवस्था में विराजमान है। माँ के दर्शन के लिए लिए टिकारी शहर, इसके आस पास के गावँ के तथा टिकारी से बाहर रहने वाले लोग भी आते रहते हैं।
भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) को हर काम को शुरु करने से पहले पूजा जाता है। गणेश जी (Ganesh ji) बुद्धि...




