हमारे सनातनधर्म में कलश स्थापन का विशेष महत्व है। प्रत्येक शुभ कार्य में तथा छोटे से छोटे व वृहद् से वृहद् पूजनकर्म व अनुष्ठान में कलश स्थापन किया जाता है, और नवरात्रि में तो इसका अपना एक अलग हीं महत्व है।
शारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय पावन पर्व सोमवार 26 सितंबर 2022 को घटस्थापना के साथ शुरू होगा। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
सूर्य पुत्र शनिदेव (Shanidev) को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं कि वह गुस्सैल, भावहीन और निर्दयी हैं। लेकिन यह सत्य नहीं है, शनिदेव न्याय के देवता हैं। इसी वजह से भगवान शिव ने शनि महाराज को नवग्रहों में न्यायाधीश का काम सौंपा है।
यह विश्व का ऐसा अनोखा मंदिर है, जो 24 घंटे में मात्र दो मिनट के लिए बंद होता है। यहां तक कि ग्रहण काल में भी मंदिर बंद नहीं किया जाता है। कारण यह कि यहां विराजमान भगवान कृष्ण को हमेशा तीव्र भूख लगती है। भोग नहीं लगाया जाए तो उनका शरीर सूख जाता है। अतः उन्हें हमेशा भोग लगाया जाता है, ताकि उन्हें निरंतर भोजन मिलता रहे।
वेद-पुराणों में ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का बहुत महत्व है, ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी शक्ति राधा रानी की लीला भूमि है। इस परिक्रमा के बारे में वारह पुराण में बताया गया है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते हैं।
यह मंदिर काफी रोचक है। पूरा मंदिर मंडूक तंत्र (Manduk Tantra) और श्रीयंत्र (Shriyantra) पर बना हुआ है। मेंढक मंदिर में स्थापित नंदी जी की मूर्ति खड़ी हुई है। जिसके लिए इस मंदिर की पूरे देश में अलग ही पहचान है। मंदिर का निर्माण करीब 230 वर्ष से भी अधिक पहले हुआ था। इसका निर्माण तत्कालीन ओयल स्टेट के राजा बख्श सिंह ने करवाया था।
शास्त्रों में नौ के आंकड़े को पूर्णांक व शुभ माना जाता है, इसलिए पूजा विधि में नौ ग्रहों की स्थापना होती है। रंग भी नौ हैं जिन्हें नवरंग कहा जाता है। श्रीराम ने शबरी को नवधा (नौ प्रकार) भक्ति का ज्ञान दिया था। नौ रसों का भी जीवन में बड़ा महत्व है। यहां हम माता के नौ रूपों को नौ रंगों में प्रस्तुत कर रहे हैं।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य ब्रह्मस्वरूप है, सू्र्य से जगत उत्पन्न होता है। सूर्य नवग्रहों में प्रमुख देवता हैं। सूर्यदेव की दो भुजाएं हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान हैं। उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। उनके सिर पर सुंदर स्वर्ण मुकुट और गले में रत्नों की माला है। सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार हैं।
किया अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान, वट वृक्ष को दिया आशीर्वाद
अक्सर श्री गणेश भगवान की प्रतिमा लाने से पहले या घर में स्थापना से पूर्व यह सवाल सामने आता है कि गणेश जी की कौन सी सूंड किस तरफ होनी चाहिए? क्या कभी किसी ने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाई या कुछ में बाई ओर होती है। सीधी सूंड वाले गणेश भगवान दुर्लभ हैं। इनकी एक तरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है।
माना जाता है कि महापंडित और शिवभक्त रावण युद्ध में अपनी विजय सुनिश्चत करने के लिए त्रिदेवों की जननी माता...
पिंडदान की शुरुआत कब और किसने की, यह बताना उतना ही कठिन है जितना कि भारतीय धर्म-संस्कृति के उद्भव की कोई तिथि निश्चित करना। परंतु स्थानीय पंडों का कहना है कि सर्व प्रथम सतयुग में ब्रह्माजी ने पिंडदान किया था। महाभारत के 'वन पर्व' में भीष्म पितामह और पांडवों की गया यात्रा का उल्लेख मिलता है। श्रीराम ने महाराजा दशरथ का पिण्डदान गया में किया था।
