राम भक्त हनुमानजी (Hanumanji) की पूंछ में चमत्कारिक असर माना गया है। यही कारण है कि ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए भी उनकी पूंछ की पूजा की जाती है। हनुमान जी को देवी-देवताओं ने कई तरह की शक्तियों का वरदान दिया है। अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता की पूंछ में भी कम ताकत नहीं होती।
सनातन संस्कृति के अनुसार कलयुग के एक मात्र दिखने वाले देवता सूर्य देव (Surya Dev) ही हैं। सूर्य देव को आरोग्य का कारक भी माना जाता है। सूर्य ब्रह्मण्ड की केंद्रीय शक्ति हैं। यह सम्पूर्ण सृष्टि का गतिदाता हैं।
वैसे तो राधा जी (Radha Rani) के जन्म के बारे में अनेक कथाएं शास्त्रों में आती हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि आज से करीब पांच हजार दो सौ वर्ष पूर्व मथुरा जिले के गोकुल-महावन कस्बे के निकट रावल गांव में भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, मध्यान्ह काल 12 बजे और सोमवार के दिन पिता वृषभानु और माता कीर्तिदा की पुत्री के रूप में श्री राधिका जी ने जन्म लिया था।
दस देशों में स्थापित गणेशी प्रतिमाओं की प्रतिकृति को यहां दर्शाया गया
भगवान राम ने सीता जी के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा से शिवजी का कठोर धनुष तोड़ कर सीता जी से विवाह किया था। लेकिन शिवजी का वह धनुष किसने और किससे बनाया था तथा वह शिव धनुष महाराज जनक जी केपास कैसे पहुंचा, इस रहस्य को बहुत कम लोग जानते हैं।
मंदिर परिसर में सूर्यदेव के अलावा शिव-पार्वती, विष्णु, भैरव, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती आदि के भी छोटे-छोटे मंदिर हैं। सूर्य मंदिर के आधार पर इस गांव को आदित्यगांव भी कहा जाता है। मंदिर में लगी सूर्य की मूर्ति सबसे बड़ी है। इस मूर्ति में भगवान सूर्यनारायण सात अश्वों के एक चक्रीय रथ पर सुखासन में बैठे हैं जिनके दोनों हाथ कंधे तक उठे हैं।
सृष्टि के आरंभ में जब देवी सरस्वती प्रकट हुई तब देवी ने अपनी वीणा के स्वर से सृष्टि में ध्वनि को जन्म दिया। लेकिन इस ध्वनि में न तो सुर था और न ही संगीत। सृष्टि के आरंभ से आनंदित शिव जी ने जैसे ही नृत्य आरंभ किया और 14 बार डमरू बजाया तभी उनके डमरू की ध्वनि से व्याकरण और संगीत के धन्द, ताल का जन्म हुआ।
पूर्वजों की परंपरा, गोत्र, संस्कार, धन-संपदा से जीवन आगे बढ़ता है। उन्हीं पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है पितृपक्ष। भाद्रपद शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि से आश्विन कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृपक्ष माना जाता है।
विश्व का सबसे बड़ा यह मंदिर कंबोडिया (Cambodia) में है। इसे अंकोरवाट (Angkor Wat) के नाम जाना जाता है। यह मंदिर अंकोरयोम नामक नगर में स्थित है, जिसे प्राचीन काल में यशोधरपुर कहा जाता था। यह विशाल भव्य मंदिर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को समर्पित है
प्रभु राम के सबसे बड़े भक्त माने जाने वाले कलयुग के जीवित देवता हनुमान जी (Hanuman ji) तब अधिक प्रसन्न होते हैं जब उनके भक्त राम नाम का जाप करते हैं। मान्यता है कि जहां कहीं भी राम कथा चलती है वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में उपस्थित होते ही हैं। माता सीता से हनुमान जी को अजर-अमर रहने का वरदान प्राप्त है।
पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं। पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी (Pataneshwari) हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं। लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं। इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है।
मां लक्ष्मी के रूप में मां त्रिपुर सुंदरी यहां विराजती हैं, यहां है एकमात्र शक्तिपीठ जहां होती है गुप्त साधना
