अनमोल कुमार इस वर्ष मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पर्व को लेकर पंचांग (Panchang) में मतभेद है। मकर संक्रांति पर्व...
भारत के साथ ही विश्व के कई देशों में प्रसिद्ध हिंदू मंदिर हैं। इसी तरह नेपाल में भी कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां हजारों हिंदू दर्शन के लिए जाते रहते हैं। इन्हीं मंदिरों में एक बेहद रहस्यमयी मंदिर है। इस मंदिर में कोई भी आम नागरिक तो पूजा कर सकता है, लेकिन नेपाल राजपरिवार के लोग इस मंदिर में पूजा नहीं कर सकते हैं। जानिए, इस मंदिर के बारे में।
इस हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) को हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi) के नाम से जाना जाता है। नैनीताल के अतिरिक्त भारत के अन्य प्रदेशों में भी हनुमान गढ़ी के नाम से कई मंदिर प्रसिद्ध हैं।
भारत में एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी (Hanuman ji) की पूजा नहीं की जाती है। यह जगह है उत्तराखंड स्थित द्रोणागिरि गांव। यहां के लोगों का मानना है कि हनुमान जी जिस पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए उठाकर ले गए थे, वह यहीं स्थित था। चूंकि द्रोणागिरि के लोग उस पर्वत की पूजा करते थे, इसलिए वे हनुमानजी द्वारा पर्वत उठा ले जाने से नाराज हो गए। यही कारण है कि आज भी यहां हनुमान जी की पूजा नहीं होती।
मान्यता है कि सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान या खास पूजा की जरूरत नहीं पड़ती। सूर्य देव को सिर्फ एक लोटा जल और उनके मंत्रों के जाप से ही उनका आशीर्वाद पाया जा सकता है।
शंकर जी बोले-हे उमा, कालकारमुख नामक एक भयानक बलवान राक्षस हुआ। ग्यारह मुख वाले उस विकराल राक्षस ने बहुत काल...
दान से मंदिर को इस वर्ष कुल 18.90 करोड़ रुपये की आय हुई है। सबसे ज्यादा शीघ्र दर्शनम कूपन से मंदिर को इनकम हुई।
सदियों से मौसम की मार झेल रहा यह मंदिर आज भी खड़ा है। पांडवों के बाद आज से लगभग 1000 वर्ष पहले 1060 ईं में राजा मांबाणि ने इस मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार करवाया।
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शिवपुराण (Shivpuran) के अनुसार, एक बार एक महादैत्य हुआ जिसका नाम था तारकासुर। इन दैत्य के तीन पुत्र हुए जिनके नाम तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली था। शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया।
कर्नाटक के उडुपी के हतियनगडी में आठवीं सदी का एतिहासिक श्री सिद्धि विनायक मंदिर (Siddhi Vinayak Temple) है। यह मंदिर कुंदापुर तालुक में बरहा नदी के पास स्थित है। यह ऐतिहासिक जगह देश-दुनिया भर के हिंदुओं के लिये एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी (Ekadashi) के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।







