पिछले दिनों भगवान राम (Lord Rama) की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया गया है कि 21 साल की उम्र में भगवान राम ऐसे दिखते थे। यह तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) ने बनाई है।
राजस्थान (Rajasthan) की अरावली पहाड़ियों (aravalli hills) की तलहटी पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर (Parshuram Mahadev Mandir) हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थानों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण परशुराम ने अपने फरसे से एक बड़ी चट्टान को काटकर किया था।
1. एक मुख्य आचार्य व चार सहायक आचार्य होने चाहिए। क्योंकि मुख्य आचार्य स्वयं व्यास स्वरूप है तो सहायक चार...
भगवान श्री गणेश का ये मंदिर भारत के दक्षिणी प्रांत आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। इसका निर्माण चोल वंश ने 11 शताब्दी में करवाया था। इसके बाद विजयनगर के शासकों ने वर्ष 1336 में इसका विस्तार किया। मंदिर के बनने की कहानी भी बेहद रोचक है।
हनुमान जी के कई स्थानों पर पदचिह्न भी बताए जाते है। ऐसे में हनुमानजी के ये पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आइए जानते हैं कहां-कहां भगवान हनुमानजी ने धरती पर अपने कदम रखे थे, जहां उनके पैरों के निशान बन गए। उनमें से कुछ प्रमुख पदचिह्नों के बारे में तस्वीरों सहित संक्षिप्त में जानें।
शनिदेव व्यक्ति को माया, मोह, असत्य, इन्द्रियजन्य सुख, विषय-वासना की आसक्ति से हटाकर परमतत्व का ज्ञान कराते हैं। साथ ही अच्छे-बुरे की पहचान भगवान शनिदेव द्वारा ही होती है। स्वार्थ की धुरी पर चलने वाली इस सृष्टि में व्यक्ति को परमात्मा की ओर मोड़ने वाले एक मात्र भगवान शनिदेव ही हैं।
भगवान शिव के फल से ज्येष्ठ की अमावस्या में भगवान शनिदेव (Shanidev) का जन्म हुआ। सूर्य के तेज और तप के कारण शनिदेव का रंग काला हो गया। लेकिन माता की घोर तपस्या के कारण शनि महाराज में अपार शक्तियों का समावेश हो गया।
बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के शुभ अवसर पर हम ऐसी जगह के बारे में बता रहे हैं, जहां मां सरस्वती...
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कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के कोप्पा में प्राचीन ‘कमंडल गणपति मंदिर’ (Kamandal Ganapati Temple) स्थित है। इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा के ठीक सामने एक जल स्रोत का उद्गम स्थल है। ये उद्गम स्थल ब्राह्मी नदी का है।
गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) में लिखते हैं, "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन्ही जानकी माता" अर्थात हनुमान जी महाराज आठ सिद्धियों और नौ निधियों के अधिकारी देव हैं, दाता हैं।
श्रीराधा जी के बारे में प्रचलित है कि वह बरसाना की थीं, लेकिन सच्चाई है कि उनका जन्म बरसाना से...






