मौसम संबंधी किसी भी पूर्वानुमान के लिए मौसम विज्ञानियों की मदद ली जाती है। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह के बारे में सुना या सोचा है, जहां खुद भगवान मौसम के बदलाव की जानकारी देते हैं। इसके साथ ही स्थानीय निवासी इस इलाके में मंदिर से गिरने वाली बूंदों से ही खेतों में जुताई और बुवाई का समय तय करते हैं।
शुक्रवार को माँ लक्ष्मी के इन सभी रूपों की वंदना करने से असीम सम्पदा और धन की प्राप्ति होती है।...
हिंदू धर्म में जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी तिथि को सबसे उत्तम माना गया है। साल भर में पड़ने वाली तमाम एकादशी में देवशयनी और देवउठनी एकादशी तिथि का बहुत महत्व है।
श्रवण माह में देवाधिदेव महादेव शिव आराधना का बड़ा महत्व है। इस दौरान जगह-जगह कांवड़ियों की लम्बी कतारें बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए भोले बाबा को जल चढ़ाते है। आखिर, श्रद्धा से जुड़ी इस परंपरा की शुरुआत कब और किसने की? इस पर अलग-अलग मत है। यहां जानें कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) किसने शुरू की।
भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखकर भगवान शिव काम-मोहित हो गए। जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप का त्याग किया तो भगवान शिव का मन दुखी हो गया। उसी समय उनका शुक्र धरती पर स्खलित हो गया। उससे एक परम प्रतापी काले रंग का असुर पैदा हुआ।
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन (Ujjain) में महाकाल (Mahakaal) के बाद हरसिद्धि माता (Harsiddhi Mata) की पूजा की जाती...
चैती देवी मंदिर (Chaiti Devi mandir) उत्तराखंड (Uttarakhand) के उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर (Kashipur) सिटी बस स्टैंड से 2.5 किमी दूर काशीपुर के कुंडेश्वरी रोड पर स्थित है। चैती देवी मंदिर को माता बालसुंदरी मंदिर (Mata Balasundari mandir) के नाम से भी जाना जाता है, कई भक्त यहां आध्यात्मिक आनंद में डूबने और पवित्र मंदिर के दर्शन करने आते हैं। मंदिर को ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Mandir) और उज्जैनी देवी (Ujjaini Devi) के नाम से भी जाना जाता है। यह काशीपुर के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है।
आपके अच्छे कार्यों के परिणामस्वरूप भी आपको कष्ट प्राप्त हो रहा है तो समझिए ईश्वर ने आपके बड़े कष्ट हर लिए
जहां अर्जुन ने महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त करने हेतू रंगीत नदी के बगल मे शिव लिंग स्थापित क्षय करके भगवान शिव की आराधना की।
मान्यताओं के अनुसार इसी दिन चारों वेदों का ज्ञान देने वाले महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। शिवपुराण के अनुसार, वेद व्यास जी भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं। ऐसे में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि सावन (Sawan) मास भगवान शिव का सबसे प्रिय है। इस पूरे महीने हर तरफ हरियाली खिल उठती है। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे। विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था।...
