कपूरथला स्थित पंच मंदिर (Panch Mandir) का निर्माण कपूरथला स्टेट के महाराजा फतेह सिंह ने 1831 में तैयार करवाया था। यह मंदिर 12 साल में तैयार हुआ था। यह मंदिर 200 साल पुराना और ऐतिहासिक है। यह भारत का दूसरा ऐसा मंदिर है, जहां सूर्य भगवान और राधा-कृष्ण के मंदिर में सुशोभित प्रतिमा पर हर सुबह सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं।
देशभर में इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) का पर्व आज 19 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के दिन कृष्ण मंदिरों की रौनक देखने लायक होती है। कान्हा के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा कृष्ण मंदिर भी है, जहां कान्हा के खिड़की से दर्शन मिलते हैं।
जन्माष्टमी उत्सव की तैयारियां देशभर में जोर-शोर से की जा रही है। लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी कब है इसको लेकर लोगों के मन में संशय है। कृष्ण जन्माष्टमी पर्व से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां यहां दी जा रही हैं।
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माना जाता है कि इस स्थान का नाम तीन पशुओं श्री यानी मकड़ी, काल यानी सर्प और हस्ती यानी हाथी के नाम पर किया गया है। कहा जाता है कि तीनों ने ही यहां पर भगवान शिव की आराधना करके मुक्ति पाई थी। मकड़ी ने शिवलिंग पर तपस्या करके जाल बनाया, सांप ने शिवलिंग पर लिपटकर आराधना की और हाथी ने शिवलिंग को जल से स्नान करवाया था।
महाभारत में सैकड़ों पात्रों, स्थानों, घटनाओं तथा विचित्रताओं व विडंबनाओं का वर्णन है। प्रत्येक हिंदू के घर में महाभारत महाकाव्य होना चाहिए। महाभारत में कई रहस्य भरे हुए हैं। महाभारत युद्ध में 8 और 18 संख्या का बहुत महत्व है। आओ जानते हैं 8 और 18 अंक का महाभारत में क्या रहस्य है।
शनिवार यानी न्याय के देवता शनिदेव का दिन है। शास्त्रों में शनिदेव को न्याय का देवता कहा गया है। नाराज होने से राजा को रंक बना देते हैं तो खुश होने पर भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
कृष्ण के जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु का षड्यंत्र रचा जाना और कारावास जैसे नकारात्मक परिवेश में जन्म होना किसी त्रासदी से कम नही था। परन्तु विपरीत वातावरण के बाद भी नंदलाला, वासुदेव के पुत्र ने जीवन की सभी विधाओं को बहुत ही उत्साह से जिवंत किया है। श्री कृष्ण की सम्पूर्ण जीवन कथा कई रूपों में दिखाई पड़ती है।
श्रीकृष्ण की लीलाओं में हमें उनके ऐश्वर्य के साथ-साथ माधुर्य के भी दर्शन होते हैं। ब्रज की लीलाओं में तो श्रीकृष्ण संसार के साथ बिलकुल बँधे-बँधे से दिखायी पड़ते हैं। उन्हीं लीलाओं में से एक लीला है बालकृष्ण द्वारा अपने पैर का अंगूठे पीने की लीला।
झांसी के ग्वालियर रोड पर सखी हनुमान मंदिर (Sakhi Hanuman Mandir), जहां बजरंगबली स्त्री रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है यहां हनुमान जी रोज़ाना रात में टहलते हैं।
वैसे तो देवाधिदेव शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन संगम के नजदीक अरैल स्थित शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर सूर्यदेव से संबंधित है। शिवपुराण और स्कन्द पुराण में इस मंदिर का वर्णन शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से किया गया है। सबसे खास बात यह है इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव के साथ ही सूर्यदेव भी प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
देवाधिदेव महादेव शिव को भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) का आराध्य और श्री हरि विष्णु (Shri Hari Vishnu) को देवाधिदेव महादेव (Mahadev) का आराध्य बताया जाता रहा है। भगवान विष्णु अगर जगत का पालन करते हैं तो भगवान शिव (Bhagwan Shiv) इस संसार का संहार करते हैं। दोनों में कोई न बड़ा है और न ही छोटा है।
