मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।
‘श्री सुदर्शन-चक्र’ भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) जी का प्रमुख आयुध है, जिसके माहात्म्य की कथाएँ पुराणों में स्थान-स्थान पर दिखाई...
वैसे तो राधा जी (Radha Rani) के जन्म के बारे में अनेक कथाएं शास्त्रों में आती हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि आज से करीब पांच हजार दो सौ वर्ष पूर्व मथुरा जिले के गोकुल-महावन कस्बे के निकट रावल गांव में भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, मध्यान्ह काल 12 बजे और सोमवार के दिन पिता वृषभानु और माता कीर्तिदा की पुत्री के रूप में श्री राधिका जी ने जन्म लिया था।
सूर्यदेव भगवान् विष्णु को गुरु मानकर उनके उत्तर भाग में आज भी स्थित हैं इसलिए वे केशवादित्य के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे काशी में अपने भक्त के अज्ञानमय अंधकार को दूर करते हैं और उनसे प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित सिद्धि देते हैं।
श्री कृष्ण और रुक्मिणी श्री राम और सीता बनकर हनुमान जी के समक्ष गए। जैसे ही हनुमान जी ने श्री राम और माता जानकी को देखा वो बच्चे की तरह रोने लगे और उनके पैरों में गिर गए।
इस मंदिर का निर्माण कांची मठ के श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी की इच्छा पर किया गया था। मंदिर का अभिषेक 5 अप्रैल 1976 को अहोबिला मठ के 44वें गुरु वेदांत ढेसिका यतीन्द्र महाधेसिकन स्वामी की उपस्थिति में हुआ था।
महाराजा सवाई जयसिंह जी ने जयपुर (Jaipur) को बसाने से पहले नगर की सुख समृद्धि के लिए चारों दिशाओं में...
14 अक्टूबर, 2023 को सूर्य ग्रहण या सूर्य ग्रहण होगा। इसके समय, कारण और अन्य विवरणों के बारे में जानें।
रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी। स्थानीय लोग इसे भूतों वाला मंदिर भी कहते हैं।
बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर (Patan Devi Mandir) शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवीभागवत और तंत्रचूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी. नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है। सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं।
करवा चौथ के व्रत में हाइड्रेटेड रहना बेहद ज़रूरी है। व्रत से पहले खूब पानी पिएं और खीरा, संतरा और तरबूज जैसे हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थों का सेवन करें। व्रत से एक घंटा पहले नारियल पानी या छाछ पीने से ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बहाल हो सकते हैं और डिहाइड्रेशन को सक्रिय रूप से रोका जा सकता है।
शास्त्रों में बुधवार का संबंध बुध ग्रह के साथ-साथ भगवान शिव जी के पुत्र भगवान गणेश जी से है और...




