इस सूर्य मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि भगवान राम यहां पहुंचे थे और इस स्थान पर रुककर भगवान सूर्य को नमन किया था। भगवान राम की स्मृति में ही सूर्य मंदिर का यहां निर्माण कराया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण और शुभ हिंदू त्योहारों में से एक, नवरात्रि, पृथ्वी पर देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। हर...
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है और मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti) का पर्व मनाया जाता है।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापंकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म...
पुत्रदा एकादशी व्रत (Putrada Ekadashi Vrat) 2022 को पौष पुत्रदा एकादशी के रूप में भी जाना जाता है, जो हर...
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत मे दो तरह की मंदिर निर्माण शैलियां है उत्तर भारत (नागर शैली) दक्षिण भारत (द्रविड़ शैली)। उत्तर भारत मे छत को मंदिर वास्तु की भाषा मे शिखर कहते है और दक्षिण भारत मे इसको विमान कहते है। दक्षिण भारत मे शिखर सिर्फ ऊपर रखे पत्थर को बोलते, जबकि उत्तर भारत मे सबसे ऊपर कलश रखा होता है। इसके अलावा इन से मिलती-जुलती कुछ और मंदिर निर्माण शैलियां भी होती है।
श्रीराधा जी के बारे में प्रचलित है कि वह बरसाना की थीं, लेकिन सच्चाई है कि उनका जन्म बरसाना से...
इस वर्ष पापमोचनी एकादशी 28 मार्च 2022 को पड़ रहा है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से उनका खास आशीर्वाद मिलता है। आइए जानें पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूज विधि और कथा।
गणेश जी की शर्त थी कि महर्षि एक क्षण के लिए भी कथावाचन में विश्राम ना लेंगे। यदि वे एक क्षण भी रूके, तो गणेश जी वहीं लिखना छोड़ देंगे। महर्षि ने उनकी बात मान ली और साथ में अपनी भी एक शर्त रख दी कि गणेश जी बिना समझे कुछ ना लिखेंगे। हर पंक्ति लिखने से पहले उन्हें उसका मर्म समझना होगा। गणेश जी ने उनकी बात मान ली।
कैलाश मानसरोवर वर्तमान तिब्बत में स्थित है और माना जाता है कि यह भगवान शिव का निवास स्थान है। इसलिए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यह विशेष रूप से भारत के लोगों के लिए एक पसंदीदा तीर्थ स्थल है।
चैत्र के उपरांत आता है वैशाख । वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं । इसे उत्तर भारत में...
लोगों का कहना है कि मंदिर की आरती शुरू होते ही इलाके से सारे कुत्ते मंदिर में पहुंच जाते हैं। आरती की पहली घंटी बजते ही श्मशामवासिनी मां के मंदिर में आसपास घूमने वाले सभी 'कुत्ते' पहुंच जाते हैं।




