भगवान शिव कितने भोले हैं यह तो...
अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि, गृह क्लेश, ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, सजा का भय, प्रॉपर्टी विवाद, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसे स्थितियों में भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप इन सभी समस्याओं से मुक्ति के लिए किया जाता है।
अनमोल कुमार पौराणिक कथा के अनुसार एक समय शनि देव (Shanidev) भगवान शंकर (Bhagwan Shankar) के धाम हिमालय पहुंचे। उन्होंने...
एक समय माता छाया के विलुप्त होने के बाद पूरे घटनाक्रम से अनजान होने के चलते संध्या के प्रति अनुराग...
भगवान शिव की बात सुनकर पार्वती मुस्कुरा उठी और कहा कि प्रभु आपकी इच्छा को पूर्ण करने के लिए मैं अवश्य मृत्यु लोक में पुरुष के रूप में अवतरित होऊंगी। आपकी प्रसन्नता के लिए मैं पृथ्वी पर वासुदेव के घर पुरुष के रूप में जन्म लूंगी, लेकिन महादेव आपको भी मेरी प्रसन्नता का ध्यान रखना होगा।
हिंदू धर्म में इंसान का वर्तमान उसके पिछले कर्मो पर और भविष्य वर्तमान कर्मों पर आधारित होता है। लेकिन यह...
शनि, ग्रह व देवता दोनों रूप में पूजे जाते हैं। शनिदेव (Shanidev) व्यक्ति को उसके अच्छे व बुरे कर्मो का फल प्रदान करते हैं। इसी कारण इन्हें कर्म दंडाधिकारी का पद प्राप्त है। यह पद उन्हें भगवान शंकर से प्राप्त है।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार अयोध्या के राजा दशरथ ज्योतिषियों के साथ बैठे हुए थे तो उन...
धार्मिक मान्यताओं में दंड के अधिकारी माने जाने वाले शनिदेव के बारे में कहा जाता है कि जिस पर भी शनि की तिरछी नजर पड़ जाए वह उनके प्रकोप से बच नहीं सकता। यहां तक कि स्वयं देवाधिदेव महादेव भी उनके प्रकोप से बच नहीं सके। आइए जानते हैं क्या है शनिदेव और महादेव की यह कहानी और किसने बनाया शनिदेव को दंड का अधिकारी।
कौरवों से जुए में राज-पाट हारने के बाद पाण्डवों को 12 साल का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। 12 साल का समय समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था और अज्ञातवास का आरंभ होना था।
सूर्य देव ने देखा कि इतना सब के बाद भी समुद्र के जल स्तर में रत्ती भर की कमी नहीं आई थी और न ही स्वयं के तेज में। जबकि इस कार्य में सहयोगी हवा भी सोंधी महक से सुरभित हो गई थी।
महाराजा सवाई जयसिंह जी ने जयपुर (Jaipur) को बसाने से पहले नगर की सुख समृद्धि के लिए चारों दिशाओं में...





