माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक चेतन पुरुष की रचना की, जो सभी गुणों से संपन्न, दोषों से रहित, सुंदर अंग वाला, अद्भुत शोभायमान, महाबली और पराक्रमी था। उन्होंने अपने इस पुत्र को विनायक का नाम दिया। यही विनायक मस्तक कटने के बाद गणेश के नाम से जाने गए।
22 अप्रैल 2023 को अक्षय तृतीया का पर्व है और इस तिथि पर भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों में छठें अवतार माने गए भगवान परशुराम की जंयती भी मनाई जाएगी।
हिंदू संस्कृति (Hindu Culture) में प्रति दिन सुबह सूर्य को जल देने की परंपरा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों देते हैं सूर्य को जल (Surya ko Jal) और क्या हैं इसके कारण।
एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी (Ekadashi) के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।
बजरंगबली (Bajrangbali) ने शनि महाराज (Shani Maharaj) को कष्टों से मुक्त कराया था और उनकी रक्षा की थी इसलिए शनि देवता (Shani Devta) ने यह वचन दिया था हनुमानजी की उपासना करने वालों को वे कभी कष्ट नहीं देंगे। शनि या साढ़े साती की वजह से होने वाले कष्टों के निवारण हेतु हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।
भगवान शिव (Bhgwan Shiv) और विष्णु (Vishnu) की ही तरह श्री गणेश (Shri Ganesha) ने भी असुरों के नाश और...
अनमोल कुमार भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ी उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया,लेकिन उनका हृदय बिलकुल...
मां तारा देवी और मंदिर की स्थापना कब और किसने किया किसी को कोई जानकारी नही है। गाव के बुजुर्ग भी इस संबंध में कुछ नही जानते। कच्ची मिट्टी और गदहिया ईट से निर्मित मंदिर के गर्भ गृह की दीवार 4-5 फीट मोटी है। गर्भ गृह की सुन्दर #नक्काशिया मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
अनमोल कुमार हिंदू धर्म (Hindu Dharma) में पूर्णिमा तिथि (Punirma Tithi) का विशेष महत्व माना जाता है। इस साल पौष...
ज्योतिष शास्त्र में जहां समस्याएं हैं तो साथ-साथ उनके शत प्रतिशत समाधान भी मौजूद हैं। दांपत्य कलह, सेपरेशन और तलाक...
गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) में लिखते हैं, "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन्ही जानकी माता" अर्थात हनुमान जी महाराज आठ सिद्धियों और नौ निधियों के अधिकारी देव हैं, दाता हैं।
‘श्री सुदर्शन-चक्र’ भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) जी का प्रमुख आयुध है, जिसके माहात्म्य की कथाएँ पुराणों में स्थान-स्थान पर दिखाई...






