विश्व में कई संस्कृतियां उभरी और उनका लय हो गया; परंतु प्राचीन हिंदू संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जो...
शनिदेव व्यक्ति को माया, मोह, असत्य, इन्द्रियजन्य सुख, विषय-वासना की आसक्ति से हटाकर परमतत्व का ज्ञान कराते हैं। साथ ही अच्छे-बुरे की पहचान भगवान शनिदेव द्वारा ही होती है। स्वार्थ की धुरी पर चलने वाली इस सृष्टि में व्यक्ति को परमात्मा की ओर मोड़ने वाले एक मात्र भगवान शनिदेव ही हैं। भगवान शनिदेव मानव को विभन्न प्रकार की कष्टाग्नि में तपाकर कुंदन बनाते हैं तथा समय के अनुसार चलना सिखाते हैं।
अनमोल कुमार माउंट आबू (mount abu) में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है, जहां भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के...
हिंदू धर्म में गणेश भगवान की पूजा का हर अनुष्ठान में सबसे पहले की जाती है। भारत ही नहीं देश के बाहर भी गणेश जी कई मंदिर हैं। इन्हीं में से एक बेंगलुरु के पास बसावनगुड़ी में मौजूद डोडा गणपति (Doda Ganpati) की प्रतिमा है।
बिहार के औरंगाबाद (Aurangabad) जिला मुख्यालय से से 18 किलोमीटर दूर स्थित देव सूर्य मंदिर (Dev Surya Mandir) करीब एक सौ फीट ऊंचा है। यहां संस्कृति के प्रतीक सूर्यकुंड को गवाह मानकर व्रती जब छठ मैया और सूर्यदेव की आराधना करते हैं, तो उनकी भक्ति देखते ही बनती है। छठ मेले में यहां जाति, संप्रदाय एवं शास्त्रीय कर्मकांड के बंधन समाप्त हो जाते हैं।
प्रत्येक देवता का एक विशिष्ट उपासनाशास्त्र है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक देवता की उपासना के अंतर्गत प्रत्येक कृत्य विशिष्ट...
विश्व में कई संस्कृतियां उभरी और उनका लय हो गया; परंतु प्राचीन हिंदू संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जो...
यह मंदिर तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले के शहर कुटनूर में स्थित है। कूटनूर से करीब 3 किमी दूर तिलतर्पण पुरी है। जहां आदि विनायक मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इस विनायक मंदिर में श्री गणेश की नरमुखी प्रतिमा यानी इंसान स्परुप की पूजा की जाती है।
तुंगनाथ मंदिर (Tungnath Mandir) दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है और यह मंदिर उत्तराखंड (Uttarakhand) के रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले में...
दुर्गा सप्तशती एक ऐसा वरदान व प्रसाद है, जो भी प्राणी इसे ग्रहण कर लेता है वह धन्य हो जाता...
देवता भी अपने कार्यों की बिना किसी विघ्न से पूरा करने के लिए गणेश जी की अर्चना सबसे पहले करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि देवगणों ने स्वयं उनकी अग्रपूजा का विधान बनाया है।
प्रत्येक देवता का एक विशिष्ट उपासनाशास्त्र है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक देवता की उपासना के अंतर्गत प्रत्येक कृत्य विशिष्ट...



