इस पौराणिक कथा की मानें तो एक तरह से क्रोधासुर श्री गणेश का भाई ही था, क्योंकि वो शिव जी के स्खलन से जन्मा उनका ही अंश था। उसी को नियंत्रित करने के लिए गणपति ने लंबोतर के रूप में अवतार लिया था
श्री कृष्ण और रुक्मिणी श्री राम और सीता बनकर हनुमान जी के समक्ष गए। जैसे ही हनुमान जी ने श्री राम और माता जानकी को देखा वो बच्चे की तरह रोने लगे और उनके पैरों में गिर गए।
भारत में नवरात्रि 2022 (Navratri 2022) हर बार की तरह इस बार भी हिन्दू धर्म के भक्तगणों द्वारा बड़े ही धूमधाम और उमंग के साथ मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन को हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है अर्थात हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इस दिन से नया वर्ष शुरू हो जाता है।
इस वर्ष पापमोचनी एकादशी 28 मार्च 2022 को पड़ रहा है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से उनका खास आशीर्वाद मिलता है। आइए जानें पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूज विधि और कथा।
शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। शनिदेव की कृष्ण भक्ति से जुड़ी दो पौराणिक कथाएं भी ये उजागर करती...
हिंदू धर्म में इंसान का वर्तमान उसके पिछले कर्मो पर और भविष्य वर्तमान कर्मों पर आधारित होता है। लेकिन यह...
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि (Navratri) नौ दिनों तक मनाई जाती है और नौ ग्रह हैं, नौ हमारी इंद्रियां हैं, नौ उपनिषद हैं और नौ दुर्गा के रूप हैं। मान्यता के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से शरीर स्वस्थ रहता है, मन प्रसन्न रहता है और सभी ग्रह अनुकूल रहते हैं।
हालांकि माता वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) के मंदिर की यात्रा साल भर चलने वाली यात्रा है, लेकिन नवरात्रि (Navratri)...
शिव महापुराण (Shiv Mahapuran) के अनुसार त्रिपुंड की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवता निवास करते हैं। इसे लगाने से आ सिर्फ आत्मा को परम शांति मिलती है बल्कि सेहत की दृष्टि से भी चमत्कारिक लाभ देती है।
जमीन पर गिरे मांस का पहला हिस्सा लहसुन में बदल गया और दूसरा हिस्सा जो तालाब में गिरा वह मछली बन गया। जमीन पर गिरी खून की बूंदें लाल मसूर बन गईं, त्वचा प्याज में बदल गई और हड्डी लाल साग में बदल गई। इसलिए कहा जाता है कि रविवार के दिन इन चीजों को खाना अशुभ होता है
देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है। यहां मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दोबारा गर्भधारण नहीं करना होता है। भगवान शिव खुद यहां तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं। अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता।
भगवान श्री गणेश का ये मंदिर भारत के दक्षिणी प्रांत आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। इसका निर्माण चोल वंश ने 11 शताब्दी में करवाया था। इसके बाद विजयनगर के शासकों ने वर्ष 1336 में इसका विस्तार किया। मंदिर के बनने की कहानी भी बेहद रोचक है।
