देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है। यहां मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दोबारा गर्भधारण नहीं करना होता है। भगवान शिव खुद यहां तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं। अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता।
परवलपुर-एकंगरसराय रोड पर है एक छोटा सा गांव है मघड़ा सिद्धपीठ। सिद्धपीठ मघड़ा (Siddhpeeth Maghda) में शीतला माता मंदिर (Sheetla...
सूर्यदेव (Surya Dev) अकेले एक ऐसे देवता जिनके साक्षात दर्शन हमें प्रतिदिन होते हैं। जिनके प्रताप से ही हम समय की खोज कर सके हैं। जिन्हें समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है। जिन्हें आदित्य, भास्कर, मार्तण्ड आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
श्रवण माह में देवाधिदेव महादेव शिव आराधना का बड़ा महत्व है। इस दौरान जगह-जगह कांवड़ियों की लम्बी कतारें बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए भोले बाबा को जल चढ़ाते है। आखिर, श्रद्धा से जुड़ी इस परंपरा की शुरुआत कब और किसने की? इस पर अलग-अलग मत है। यहां जानें कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) किसने शुरू की।
राजस्थान के झुंझनूं जिले से 70 किलोमीटर दूर आड़ावल पर्वत के उदयपुरवाटी के कस्बे में लोहार्गल (Lohargal) स्थित सूर्य मंदिर (Surya Mandir) को भगवान सूर्य (Bhagwan Surya) का घर माना जाता है। इसका संबंध पांडवों से जुड़ा हुआ है। इस तीर्थ स्थल को पुष्कर (Pushkar) तीर्थ (Pushkar) के सभी तीर्थों में से मुख्य तीर्थ स्थल माना जाता है।
सोमवार को कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की शुरुआत हो गई। इस नवरात्रि मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरीके से पूजा की जाएगी। आयुर्वेद में मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरह से परिकल्पना की गई है। जमशेदपुर की आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ का कहना है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में विराजमान है। आइये जानते हैं वो कौन सी औषधि हैं।
पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं। पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी (Pataneshwari) हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं। लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं। इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है।
राम नवमी के महत्व के बारे में पौराणिक मान्यताओं में बताया गया है कि चैत्र शुक्ल नवमी के दिन अयोध्या के राजा दशरथ के घर माता कौशल्या की कोख से विष्णु अवतार राम का जन्म हुआ था।
Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं...
देश में अनेक मंदिर ऐसे हैं, जो अपने अंदर तमाम अनसुलझे रहस्यों को समेटे हुए है। विज्ञान भी इसकी तह तक नहीं जा सका। ऐसा ही है छत्तीसगढ़ के गरियाबंद शहर से 12 किलोमीटर दूर हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित निराई माता मंदिर (Nirai Mata Mandir)।
भोले के दर्शन करने वालों के लिए बड़ी खुशी की खबर है। श्राइन बोर्ड (Shrine Board) ने इस साल करीब दो साल से बंद पड़ी अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) 30 जून से शुरू करने का फैसला किया है। इस बार यह यात्रा करीब 45 दिनों की होगी। इसका समापन पहले की ही तरह रक्षाबंधन पर होगा।
जिस प्रकार महादेव की महिमा अपरम्पार है उसी प्रकार उनके रूप-स्वरुप की भी महिमा अपरम्पार है। महादेव (Mahadev)अपने शरीर पर...


