यह कराची में उन हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है, जो भारत में गंगा या सिंधु के किनारे की यात्रा नहीं कर सकते।
हिन्दू धर्म में पंचदेव की पूजा रोज करनी चाहिए। इनमें गणेशजी, शिवजी, विष्णुजी, मां दुर्गा और सूर्यदेव शामिल हैं। रोज सुबह सूर्यदेव (Suryadev) के दर्शन करने से कुंडली के सूर्य और अन्य ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं। सूर्य साक्षात दिखाई देने वाले भगवान माने जाते हैं।
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) हिंदू कैलेंडर में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है।
इस मंदिर को गणपतिपुले मंदिर (Ganpatipule temple) के नाम से जाना जाता है और यह मंदिर रत्नागिरि जिले में स्थित है। मंदिर आश्चर्यजनक रूप से 400 साल पुराना है।
आज शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन है। मान्यता है कि आज के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करने पर माता की कृपा हमेशा व्यक्ति पर बनी रहती है। साथ ही व्यक्ति को सुख-समृद्धि और शांति भी मिलती है।
इस सूर्य मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि भगवान राम यहां पहुंचे थे और इस स्थान पर रुककर भगवान सूर्य को नमन किया था। भगवान राम की स्मृति में ही सूर्य मंदिर का यहां निर्माण कराया गया है।
शास्त्रों में कुछ देवी-देवताओं की मूर्तियां या फोटो को घर पर रखना वर्जित माना गया है। इन्हीं में से एक शनिदेव की मूर्ति भी है।
शिवपुराण (Shivpuran) के अनुसार, एक बार एक महादैत्य हुआ जिसका नाम था तारकासुर। इन दैत्य के तीन पुत्र हुए जिनके नाम तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली था। शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया।
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पौराणिक मान्यताओं अनुसार प्रभु ने त्रेता में श्री राम के रूप में अवतार लेकर बाली को छुपकर तीर मारा था। कृष्णावतार के समय भगवान ने उसी बाली को जरा नामक बहेलिया बनाया और अपने लिए वैसी ही मृत्यु चुनी, जैसी बाली को दी थी।
भगवान व्यास भगवान के एक अवतार माने जाते हैं। अलौकिक दिव्य शक्ति वाले वे आज भी अमर हैं। वे समय-समय पर प्रकट होकर ये अधिकारी पुरुषों को अपना दर्शन देकर कृतार्थ किया करते हैं।
नंदी को भक्ति और शक्ति के प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि जो भी भगवान भोले (Bholenath) से मिलना चाहता है नंदी पहले उसकी भक्ति की परीक्षा लेते हैं। भगवान शिव के प्रति नंदी की भक्ति और समर्पण की वजह से ही कलियुग में भी भगवान शिव के साथ नंदी की पूजा की जाती है।












