कलयुग में बजरंग बली (Bajrangbali) हनुमानजी (Hanumanji) को हिन्दू धर्म में बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मंगलवार को इनका पूजन करना बहुत शुभफलदायी मन जाता है।
इस प्राचीन भगवान जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर एक पत्थर लगा है। मान्यता है कि मई-जून की चिलचिलाती धूप व गर्मी के बीच पत्थर से पानी की छोटी-बड़ी बूंदे मानसून आने के लगभग 20 दिन पहले ही टपकने लगती हैं।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले के गांव वाण में एक बेहद ही अद्भुत ‘लाटू देवता मंदिर’ (Latu Devta Mandir) है।
अपने देश में एक ऐसा मंदिर भी है, जो सिर्फ पत्थरों पर पत्थर रख कर बनाया गया है। जिसकी ऊंचाई 216 फीट है और जो पिछले 1000 वर्षों से बिना झुके खड़ा है, तो क्या आप विश्वास करेंगे?
भारत में हनुमान जी के देशभर में कई प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं। परंतु झांसी में स्थापित हनुमान मंदिर ऐसा है, जो अपनी खास विशेषता के कारण के चलते चर्चा का विषय बना हुआ है।
योगिनी एकादशी 14 जून, बुधवार को है। भगवान श्रीहरि विष्णु को एकादशी की तिथि अत्यंत प्रिय होती है। इसलिए जो भी भक्त किसी भी एकादशी का व्रत करते हैं, उसका फल उन्हें कई गुना अधिक मिलता है।
भगवान श्रीकृष्णद्वैपायन वेदव्यासजी ने अपनी तपस्या और ब्रह्मचर्य की शक्ति से वेदों का विभाजन कर मन-ही-मन में महाभारत (Mahabharat) की...
कुछ जगहों पर ऐसा जिक्र मिलता है कि कृष्ण की 64 कलाएं ही उनकी गोपियां थीं और राधा उनकी महाशक्ति थी। इसके मायने ये हुए कि राधा और गोपियां कृष्ण की ही शक्तियां थीं जिन्होंने स्त्री रूप लिया था।
ॐ का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनि तरंगे उत्पन्न होती है, जो किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक घातक रोगों के कारण का समूल विनाश व शारीरिक व मानसिक विकास का मूल कारण है।
प्रभु जगन्नाथ स्वामी बीमार हो गए। अब अगले पंद्रह दिन नहीं होगे दर्शन। जानें कैसे?
विनायक, गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी (Ganesh ji) जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।
ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को पूरी दुनिया में जाना जाता है। आखिर क्या हैं, इस मंदिर में? दरअसल, इस मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें है, जिसके पीछे का रहस्य विज्ञान भी नहीं आज तक ढूंढ सका।












