सूर्य पुत्र शनिदेव (Shanidev) को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं कि वह गुस्सैल, भावहीन और निर्दयी हैं। लेकिन यह सत्य नहीं है, शनिदेव न्याय के देवता हैं। इसी वजह से भगवान शिव ने शनि महाराज को नवग्रहों में न्यायाधीश का काम सौंपा है।
हनुमान जी (Hanuman ji) कलयुग के देवता (Kalyug ke Devta) है, इसलिए सबसे ज्यादा भक्त उनके ही हैं। संकट मोचन हनुमान (Sankat Mochan Hanuman) अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं और उन्हें बल, बुद्धि, यश का वरदान देते हैं। सभी जानते हैं कि हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है, लेकिन हनुमान जी की शादी हुई थी। उसके बाद भी उन्हें ब्रह्मचारी कहा जाता है। ऐसा क्यों?
शालीग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर है, जिसका प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान #विष्णु जी का आह्वान...
अंगद बोले सिर्फ सांस लेनेवालों को जीवित नहीं कहते – सांस तो लुहार का भाता भी लेता है, तब अंगद...
शिव पुराण (Shiv Puran) के अनुसार चन्द्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। यह कन्याएं 27...
यह मंदिर उड़ीसा (Odisha) के टिटलागढ़ (Titlagarh) में मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के दरवाजे बंद कर देने पर इस मंदिर के अंदर बहुत अधिक ठंडक बढ़ जाती है।
शनिदेव (Shanidev) को न्याय का देवता कहा जाता है। शनिदेव अच्छों के साथ अच्छा करते हैं और बुरों के साथ काफी ज्यादा बुरा करते हैं। शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से परेशान लोगों को इस दिन शनिदेव की खास पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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सोने की लंका पार्वती जी ने ही बनवाई थी, जानें पूरी गाथा
भगवान विष्णु की उत्पत्ति के संबंध में पुराणों में कई कहानियां है, जिनमें से एक कहानी शिव पुराण (Shiv Puran) में वर्णित है। जानिए, आखिर विष्णु जी (Lord Vishnu) का जन्म कैसे हुआ था।
विवाह के समय ब्रह्मवेत्ता मुनियों के निर्देश पर शिव-पार्वती ने गणपति की पूजा संपन्न की। कोई व्यक्ति संशय न करें, क्योंकि देवता (गणपति) अनादि होते हैं।




