शुक्रवार को माँ लक्ष्मी के इन सभी रूपों की वंदना करने से असीम सम्पदा और धन की प्राप्ति होती है।...
शेषनाग सभी ग्रहों को अपनी कुंडली में धारण कर विष्णु मंत्र का करते हैं जाप आपने तस्वीरों में भगवान विष्णु...
एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से...
नई दिल्लीः श्राद्ध में पितरों तथा देवताओं को नेवैद्य दिखाना, एक महत्त्वपूर्ण क्रिया है । इसलिए इसका शास्त्र जानना आवश्यक है...
महाभारत (Mahabhart) में युद्ध रोकने के लिए श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से दूत के रूप में हस्तिनापुर गए थे। वे दुर्योधन के पास गए और पांडवों से युद्ध न करने की सलाह दी। श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को बहुत समझाया कि वह ये युद्ध न करे। लेकिन, वह नहीं माना। दुर्योधन ने अपने महल में श्रीकृष्ण का स्वागत किया और उनसे भोजन करने का आग्रह भी किया।
महाभारत (Mahabharat) के कुछ रोचक किस्से ऐसा हैं, जो बहुत कम सुने जाते हैं। इनमें से एक है अर्जुन (Arjun)...
हिंदू धर्म में सप्ताह के सभी सात दिनों का अलग-अलग महत्व है। ये सात दिन अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित किए...
एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से...
नई दिल्लीः श्राद्ध में पितरों तथा देवताओं को नेवैद्य दिखाना, एक महत्त्वपूर्ण क्रिया है । इसलिए इसका शास्त्र जानना आवश्यक है...
भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का पांचजन्य शंख (Panchajanya Shankh) बड़ा ही विशिष्ट शंख है, यह दुर्लभ है। कहते हैं इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन में उत्पन्न रत्नों में छठा रत्न यही शंख था और उसके पश्चात भगवान विष्णु के पास माता लक्ष्मी तथा यह शंख सुशोभित हुए। किन्तु महाभारत में भी इस शंख की उपस्थिति का वर्णन है।
पौराणिक मान्यताओं अनुसार प्रभु ने त्रेता में श्री राम के रूप में अवतार लेकर बाली को छुपकर तीर मारा था। कृष्णावतार के समय भगवान ने उसी बाली को जरा नामक बहेलिया बनाया और अपने लिए वैसी ही मृत्यु चुनी, जैसी बाली को दी थी।
भगवान शिव (Lord Shiva) के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है। शिव के जन्म की कहानी हर कोई जानना चाहता है।



