Kolkata Durga Puja Stampede: 19 की मौत, कई घायल; कुप्रबंधन पर उठे सवाल!

Kolkata Durga Puja Stampede: 19 की मौत, कई घायल; कुप्रबंधन पर उठे सवाल!कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम मची भगदड़ में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा भारी बारिश और बढ़ती भीड़ के बीच पंडाल के निकास द्वार के पास हुआ। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजामों और आयोजकों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।

कैसे हुई दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़?
पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब 7:40 बजे हुई। चोरबागान का शारदा पार्क पंडाल गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में आता है। हादसे के बाद पंडाल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया और घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया।

चश्मदीदों के मुताबिक, सप्तमी की शाम उत्तरी और मध्य कोलकाता में भारी बारिश शुरू हो गई थी। इसके कारण सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ और पंडाल के बाहर भीड़ बढ़ने लगी। बताया जा रहा है कि बारिश से बचने के लिए कुछ लोग तेजी से पंडाल में प्रवेश करने लगे, जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया कि पंडाल से बाहर निकलने के लिए लोगों को एक ऊंचे, गोलाकार कॉरिडोर से होकर गुजरना पड़ता था। इसी रास्ते पर भगदड़ मचने की बात सामने आई है। हालांकि, हादसे का सटीक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

चश्मदीदों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पंडाल में मौजूद दीपाली दास के मुताबिक, बारिश तेज होने से पहले ही भीड़ बढ़ने लगी थी। इसके बाद और लोगों के अंदर आने से धक्का-मुक्की हुई और लोग घायल हो गए।

एक अन्य चश्मदीद सैकत बनर्जी ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर आयोजकों, स्वयंसेवकों और पुलिस की पर्याप्त मौजूदगी नहीं थी। कुछ अन्य लोगों ने भी दावा किया कि मदद के लिए आवाज लगाने के बावजूद उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिली।

आयोजक बिकास दास ने कहा कि घटना की वजह अभी स्पष्ट नहीं है और उनकी प्राथमिकता घायलों को अस्पताल पहुंचाना थी। उनके अनुसार, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच रही थीं।

अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, घायलों का इलाज आपातकालीन ऑब्जर्वेशन वार्ड में किया गया। रिपोर्टों में 11 घायलों को एसएसकेएम अस्पताल स्थानांतरित किए जाने की जानकारी भी दी गई। कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंदा ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

SIT जांच और CCTV फुटेज जुटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार रात मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ अस्पताल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को सहायता का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री ने पूजा क्लब के सदस्यों को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और CCTV फुटेज जुटाने की बात कही। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश भी दिया गया।

जांच में हादसे के कारणों, भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था, प्रवेश और निकास मार्गों तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख, घायलों को ₹5 लाख
राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को ग्रुप डी की नौकरी देने और घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है। घायलों को 5-5 लाख रुपये देने की भी घोषणा की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता देने का ऐलान किया। उन्होंने घटना पर दुख जताया।

रिपोर्टों के अनुसार, अमित शाह के रविवार को घायलों से मिलने की संभावना जताई गई थी।

राज्य सरकार ने सहायता और जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800345678 भी जारी किया है। इस नंबर की आधिकारिक पुष्टि कर लेने के बाद ही इसे प्रकाशित करें।

‘भाइपो’ विवाद से जुड़ी राजनीतिक बयानबाजी
हादसे के बाद पूजा समिति के नेतृत्व और राजनीतिक संबंधों को लेकर भी विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पूजा समिति के साथ भाजपा के कथित संबंधों पर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा विधायक विजय ओझा पूजा समिति के अध्यक्ष हैं, जबकि देबादीप अधिकारी आयोजक बताए गए हैं। देबादीप को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का भतीजा बताया जा रहा है।

बंगाल की राजनीति में ‘भाइपो’ यानी भतीजा शब्द पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। भाजपा अपने अभियानों में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी को लेकर इस शब्द का इस्तेमाल करती रही है।

TMC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पूजा समिति के कथित राजनीतिक संबंधों और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि हादसे में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है।

हालांकि, राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति या संगठन की कानूनी जिम्मेदारी साबित नहीं करते। हादसे की वास्तविक वजह और जवाबदेही जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होंगे।

अब तक क्या पता है?
मृतक: कम से कम 19 लोगों की मौत की सूचना।
घटना का समय: सप्तमी की शाम करीब 7:40 बजे।
संभावित परिस्थितियां: भारी बारिश, बढ़ती भीड़ और निकास मार्ग पर धक्का-मुक्की।
जांच: SIT गठित करने और CCTV फुटेज जुटाने के निर्देश।
मुआवजा: राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख और घायलों को ₹5 लाख देने की घोषणा; केंद्र की ओर से अलग सहायता।
अहम सवाल: भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं, इसका जवाब जांच के बाद सामने आएगा।

कोलकाता की यह घटना बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षित प्रवेश-निकास, भीड़ की निगरानी और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था के महत्व को फिर से सामने लाती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)