
Nationwide NRC Debate: देश में National Register of Citizens (NRC) को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। RSS ने पूरे देश में NRC लागू करने की मांग दोहराई है, जबकि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने Special Intensive Revision (SIR) को NRC से जोड़ते हुए इसका विरोध किया है। ओवैसी ने NRC को लेकर कहा है कि यह SIR से भी “100 गुना ज्यादा बुरा” हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने फिलहाल देशभर में NRC लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
RSS ने क्यों उठाई Nationwide NRC की मांग?
RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेडकर ने 30 सितंबर को दिल्ली के IGNCA में आयोजित एक कार्यक्रम में NRC की जरूरत पर बात की। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि आबादी में असंतुलन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए नागरिकों की स्पष्ट पहचान जरूरी है।
RSS का तर्क है कि NRC के जरिए भारतीय नागरिकों की पहचान स्पष्ट की जा सकती है। अंबेडकर ने इसे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची में गलत तरीके से शामिल लोगों की पहचान करना जरूरी है।
अंबेडकर ने Citizenship Amendment Act (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने और नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया को अलग-अलग पहलुओं के रूप में रेखांकित किया।
NRC को लेकर सरकार का मौजूदा रुख क्या है?
RSS की मांग के बावजूद देशभर में NRC लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
वर्तमान में देश में Census 2027 की प्रक्रिया चल रही है। Census के लिए जारी प्रश्नावली में राष्ट्रीयता, माता-पिता की जानकारी, आधार, वोटर ID और अन्य विवरणों से जुड़े सवाल शामिल किए गए हैं। इनमें से कुछ सवाल पहले National Population Register (NPR) की 2020 में अधिसूचित प्रश्नावली में भी थे।
हालांकि, NPR और NRC के बीच कानूनी संबंध को लेकर पहले से बहस होती रही है। Citizenship Rules में Population Register के सत्यापन के बाद नागरिकों के National Register से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। लेकिन मौजूदा Census प्रक्रिया अपने आप में देशव्यापी NRC लागू किए जाने की घोषणा नहीं है।
NRC क्या है?
National Register of Citizens (NRC) भारतीय नागरिकों से संबंधित आधिकारिक रजिस्टर की व्यवस्था है।
1951 की जनगणना के बाद NRC तैयार किया गया था। बाद में असम में अवैध प्रवासन और Assam Accord से जुड़े मुद्दों के कारण NRC को विशेष महत्व मिला।
असम में NRC की प्रक्रिया पूरे देश से अलग कानूनी और ऐतिहासिक संदर्भ में हुई। वहां नागरिकता की जांच के लिए यह देखा गया कि व्यक्ति या उसके पूर्वज 24 मार्च 1971 तक या उससे पहले असम में मौजूद थे या नहीं।
असम का NRC क्यों महत्वपूर्ण है?
असम में NRC अपडेट की प्रक्रिया में 1951 NRC, पुराने मतदाता रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से असम का अनुभव देशव्यापी NRC की बहस में लगातार संदर्भ का विषय बना हुआ है।
RSS लंबे समय से देशभर में NRC की मांग करता रहा है। संगठन के नेताओं ने पहले भी इसे नागरिकों की पहचान और अवैध प्रवासन से जुड़े मुद्दों से जोड़कर उठाया है।
SIR और NRC को लेकर क्या कह रहे हैं ओवैसी?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने SIR को लेकर केंद्र और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि SIR को भविष्य में NRC के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और उन्होंने इसे “backdoor NRC” कहा है।
ओवैसी का यह एक राजनीतिक आरोप है; SIR और NRC अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। SIR चुनावी मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित प्रक्रिया है, जबकि NRC नागरिकता की पहचान से संबंधित व्यवस्था है।
SIR को लेकर देश में राजनीतिक विवाद पहले से चल रहा है और विपक्षी दल भी इसे NRC की संभावित दिशा से जोड़ते रहे हैं।
ओवैसी ने NRC को ‘100 गुना ज्यादा बुरा’ क्यों कहा?
ओवैसी ने NRC के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अगर देशभर में नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया शुरू होती है तो बड़ी संख्या में लोगों को दस्तावेज पेश करने पड़ सकते हैं।
उन्होंने खास तौर पर गरीबों, प्रवासियों तथा सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के सामने दस्तावेज जुटाने की चुनौती का मुद्दा उठाया। ओवैसी ने असम में NRC के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि देशभर में NRC लागू होने की स्थिति उससे कहीं अधिक व्यापक प्रभाव वाली हो सकती है।
यह ओवैसी का राजनीतिक आकलन और आरोप है, कोई आधिकारिक सरकारी आकलन नहीं।
NRC और SIR में क्या अंतर है?
NRC = “देश का नागरिक कौन है?”
SIR = “मतदाता सूची में पात्र मतदाता कौन है?”
यानी दोनों प्रक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। SIR में किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने या जुड़ने का मतलब अपने-आप उसकी भारतीय नागरिकता खत्म या साबित होना नहीं है।
फिर SIR को NRC से क्यों जोड़ा जा रहा है?
यह मुख्यतः राजनीतिक बहस का विषय है। असदुद्दीन ओवैसी और कुछ विपक्षी नेता SIR को संभावित “backdoor NRC” बताते हैं, जबकि SIR का आधिकारिक उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण है। इसलिए SIR को सीधे NRC कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा; दोनों की कानूनी भूमिका अलग है।
फिलहाल तस्वीर यह है कि RSS ने देशव्यापी NRC की मांग जरूर दोहराई है, लेकिन केंद्र सरकार ने पूरे देश में NRC लागू करने का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया है।
वहीं Census 2027 की प्रक्रिया जारी है और NPR से जुड़े सवालों तथा SIR को लेकर राजनीतिक बहस ने NRC के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। इसलिए “NRC लागू हो गया” या “सरकार ने Nationwide NRC घोषित कर दिया” कहना अभी सही नहीं होगा।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
