Richest Indians: ₹187.5 लाख करोड़ की संपत्ति, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर की GDP से भी ज्यादा

Richest Indians: M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के मुताबिक, भारत में अरबपतियों और बेहद अमीर लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में शामिल 1,810 लोगों की कुल संपत्ति ₹187.5 लाख करोड़ (लगभग $1.96 ट्रिलियन) आंकी गई है। यह राशि तुर्की, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों की GDP से अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगातार तीसरे साल हर महीने औसतन दो से ज्यादा नए अरबपति जुड़े हैं। हालांकि, अरबपतियों की संपत्ति में तेज बढ़ोतरी को भारत की पूरी आबादी की आय या जीवन स्तर का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता।

किन सेक्टरों से सबसे ज्यादा संपत्ति बनी?
हुरुन इंडिया के फाउंडर और चीफ रिसर्चर अनस रहमान जुनैद के अनुसार, भारत में नई संपत्ति बनाने वाले कारोबार कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इनमें AI, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और फार्मास्यूटिकल्स प्रमुख हैं।

इस साल अकेले इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर से 44 नए लोग रिच लिस्ट में शामिल हुए।

रिपोर्ट में समान आधार पर तुलना करते हुए कुछ प्रमुख सेक्टरों में संपत्ति की वृद्धि इस प्रकार बताई गई है:

एयरोस्पेस और डिफेंस: 69%
ग्रीन एनर्जी: 31%
इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स: 31%
मेटल्स और माइनिंग: 30%
फार्मास्यूटिकल्स: 25%
फाइनेंशियल सर्विसेज: 23%

जुनैद के मुताबिक, मजबूत ऑर्डर बुक, क्षमता विस्तार और निर्यात से इन क्षेत्रों में संपत्ति बढ़ने में मदद मिली।

कुछ कंज्यूमर सेक्टरों में घटी संपत्ति
जहां कुछ इंडस्ट्रियल और निवेश आधारित क्षेत्रों में तेजी देखने को मिली, वहीं कई कंज्यूमर सेक्टरों में सूचीबद्ध अमीरों की संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक:
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: -21%
फूड एंड बेवरेजेज: -9%
कंज्यूमर गुड्स: -8%
रिटेल: -5%

जुनैद ने यह भी कहा कि किसी इंडस्ट्री में अरबपतियों की संपत्ति तेजी से बढ़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग भी उसी गति से मजबूत हो रही है।

अरबपतियों की संपत्ति और आम भारतीय की आय में अंतर
रिच लिस्ट में शामिल लोगों की कुल संपत्ति की तुलना दूसरे देशों की GDP से करना बड़ा आंकड़ा जरूर दिखाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आम भारतीय की आय भी उसी स्तर पर पहुंच गई है।

रिपोर्ट में IMF के आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत की प्रति व्यक्ति GDP करीब $2,813 बताई गई है, जबकि सिंगापुर की प्रति व्यक्ति GDP करीब $107,760 है।

इसलिए अरबपतियों की कुल संपत्ति और आम नागरिक की औसत आय को अलग-अलग आर्थिक संकेतकों के रूप में देखना जरूरी है।

असली असर: रोजगार, टैक्स और निवेश
अनस रहमान जुनैद के मुताबिक, 1,810 लोगों की ₹187.5 लाख करोड़ की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनके कारोबारों में हिस्सेदारी के रूप में है, न कि बैंक खातों में रखी नकदी के रूप में।

उनके अनुसार, इन कारोबारों के आर्थिक प्रभाव को समझने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि वे कितनी नौकरियां पैदा करते हैं, कितना टैक्स देते हैं और कारोबार के विस्तार में कितना दोबारा निवेश करते हैं।

हुरुन इंडिया के मुताबिक, उसकी रिच लिस्ट में शामिल शहरों की संख्या भी बढ़ी है। शुरुआत में जहां सूची में 10 भारतीय शहर थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 106 शहरों तक पहुंच गई है। इस साल बागलकोट, सोलन, मंडी, गोविंदगढ़ और मिर्जापुर समेत नौ नए शहर इसमें शामिल हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े महानगरों के बाहर भी बायोएनर्जी, इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड मटीरियल जैसे क्षेत्रों में नए उद्यमी सामने आ रहे हैं।

टॉप-10 में शामिल होने के लिए कितनी संपत्ति जरूरी?
M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के अनुसार, इस साल टॉप-10 में जगह बनाने के लिए संपत्ति की सीमा बढ़कर ₹1.89 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह सीमा ₹1.83 लाख करोड़ थी।

इसी तरह, टॉप-100 में शामिल होने की संपत्ति सीमा ₹30,190 करोड़ से बढ़कर ₹33,000 करोड़ हो गई।

M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 का टॉप-10
रिपोर्ट में भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में टॉप-10 नामों को अलग से रैंक किया गया है। यहां उनके नाम, अनुमानित संपत्ति और प्रमुख कारोबारी क्षेत्र की जानकारी दी जा सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)