अंतरराष्ट्रीय विकास संस्था क्रिश्चियन एड की एक ताजा रिपोर्ट ने जलवायु संकट की विभीषिका को उजागर किया है.
धरती के 7,000 से अधिक शहरों में हुए वायु गुणवत्ता विश्लेषण ने पेश की परेशान करने वाली तस्वीर
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नेट-ज़ीरो रिपोर्ट के मद्देनज़र LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) के लिए निवेश का माहौल बदल चुका है। इस...
ऑस्कर विजेता निर्माताओं द्वारा बनाई यह फीचर फिल्म पोप फ्रांसिस की व्यक्तिगत कहानी की न सिर्फ एक अनदेखी झलक पेश करती है बल्कि वैश्विक जलवायु न्याय के लिए दबाव भी बनाती है
मैंग्रोव वनों को दुनिया का "सबसे अधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्र" करार देते हुए, भारत मंगलवार को मिस्र के शर्म अल-शेख में पार्टियों के सम्मेलन (COP27) के 27वें शिखर सम्मेलन में जलवायु के लिए मैंग्रोव गठबंधन (MAC) में शामिल हो गया। इस गठबंधन को यूएई, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन और श्रीलंका का समर्थन प्राप्त है।
कभी सोचा है कोई मुद्दा सियासी कब बनता है? बात आगे बढे उससे पहले ज़रा समझ लेते हैं कि सियासत...
एक कड़वा सच जो मूंह बाए देख रहा है वो ये है कि चीन को छोड़कर, विकासशील देशों को 2030 तक जलवायु वित्त में कम से कम 2.4 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता है। वहीं 54 देशों में आर्थिक संकट ने उन्हें ऋण संकट में भी डाल दिया है, जिससे उनके विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली का रुख करने में बाधा आ रही है।
पृथ्वी पर पहली बार मानवता के लिए सुरक्षा और न्याय का ऐसा मूल्यांकन किया गया है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार यह बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि अर्थ कमीशन नाम के इस समूह का निष्कर्ष है कि पृथ्वी के लिए अब तक कई सुरक्षित सीमाएं पहले ही पार हो चुकी हैं।
पिछले साल की ही तरह, इस साल भी कुछ महीनों से, देश के कुछ हिस्से कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर...
तमाम कयासों को शांत करते हुए भारत के ऊर्जा एवं रिन्यूएबिल एनर्जी मंत्री राज कुमार सिंह ने न सिर्फ साफ़...
दुनिया के 61 प्रतिशत देश, दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषण करने वाले देशों में 9 प्रतिशत राज्य और 50 लाख...
क्या है विद्युत संशोधन विधेयक 2022 में ख़ास, क्यों हो रहा है इसका विरोध, क्या कहना है विशेषज्ञों का?


