आईईए के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook) के ताजा संस्करण के मुताबिक युक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उत्पन्न हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट गहरे और लम्बे वक्त तक बरकरार रहने वाले बदलावों की वजह बन रहा है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा प्रणाली में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रूपांतरण को तेज करने की क्षमता रखते हैं।
WMO के ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse gas) बुलेटिन ने 2021 में मीथेन कौन्सेंट्रेशन (Methane Concentration) में साल-दर-साल की सबसे बड़ी छलांग की जानकारी दी। गैसों के वायुमंडलीय कौन्सेंट्रेशन की माप बीते चालीस सालों से हो रही है और यह उछाल बीते 40 साल में सबसे बड़ी है।
इस बार 2015 के बाद से अपेक्षाकृत दिवाली सप्ताह रहा स्वच्छ, पटाखों ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को नहीं किया ज्यादा प्रभावित
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर को देखते हुए इस बार दिवाली से पहले फिर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू हो गया है।
एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि जलवायु संकट (climate crisis) के बिगड़ते प्रभावों के बावजूद और यूक्रेन (Ukraine) पर रूस (Russia) के आक्रमण से उत्पन्न ऊर्जा संकट से पहले भी जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) के उत्पादन के लिए जी20 देशों की सरकारों का समर्थन 2021 में 64 बिलियन अमरीकी डालर की नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया था।
हालांकि देश की परिवहन प्रणाली तेज़ गति से विकास कर रही है, मगर उसी अनुपात में परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में भी बढ़त हो रही है। ध्यान रहे कि भारत में होने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन में परिवहन या ट्रांसपोर्ट सेक्टर का योगदान लगभग 14 प्रतिशत है। और इसमें से 90 प्रतिशत उत्सर्जन अकेले सड़क परिवहन से होता है।
संयुक्त राष्ट्र की आज जारी एमिशन्स गैप रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2021 में ब्रिटेन के ग्लासगो में हुए CoP26 में सभी देशों द्वारा अपने नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशंस (Nationally Determined Contributions) को और मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किये जाने और राष्ट्रों द्वारा कुछ अपडेटेड जानकारी दिये जाने के बावजूद प्रगति के मोर्चे पर बुरी तरह नाकामी ही नजर आ रही है।
जहां एक ओर भारत ने साल 2070 तक नेट ज़ीरो (Net Zero) होने का अपना लक्ष्य दुनिया के सामने रखा है, वहीं इस संदर्भ में दुनिया की सबसे बड़ी उप-राष्ट्रीय इकाई, उत्तर प्रदेश, न सिर्फ राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होने की कोशिशें कर रही है बल्कि वह भारत की सबसे बड़ी यातायात व्यवस्था को भी प्रदूषण मुक्त (Pullution free) करने की कवायद में सक्रिय है।
सभी देश और वहाँ की स्वास्थ्य प्रणालियाँ COVID-19 महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से उबर ही रही थीं कि ठीक तब ही रूस और यूक्रेन के संघर्ष ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया। और इस सब के साथ जलवायु परिवर्तन (Climate change) बेरोकटोक अपनी गति से बढ़ता चला जा रहा है।
इस सर्वे में शामिल 64% लोगों का कहना है कि भारत सरकार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वैश्विक लड़ाई में स्थानीय कार्यवाही की प्रासंगिकता को लगातार सिद्ध करने के लिए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को वैश्विक पटल पर अपने नवाचारों को पूरी दुनिया के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत करने का एक मौका देना का फैसला किया है।
भारत में लगातार चौथे वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। इस अधिक बारिश के लगातार तीसरे वर्ष होने के लिए लिए प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना (La Nina) को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
