इस बार 2015 के बाद से अपेक्षाकृत दिवाली सप्ताह रहा स्वच्छ, पटाखों ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को नहीं किया ज्यादा प्रभावित
ग्लासगो में अगले महीने आयोजित होने वाली सीओपी26 और दिसम्बर में इटली की मेजबानी में होने जा रही जी20 शिखर...
स्टील उत्पादन में लगी कंपनियों को कार्बन उत्सर्जन मुक्त बनाने की तमाम प्रतिबद्धताओं के बावजूद, दुनिया के स्टील उत्पादन और...
नई दिल्ली: ‘ट्रुथ’(Truth) मासिक पत्रिका के संपादक और बंगाल के ‘शास्त्र धर्म प्रचार सभा’ के सहसचिव (डॉ.) शिवनारायण सेन ने...
कोविड महामारी से जुड़ी फ़िक्र और जापान की भीषण गर्मी, मिलकर बढ़ाएगी खिलाडियों की परेशानी आज से ओलिंपिक खेलों का...
एक नए अध्ययन से पहली बार यह पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्री जीवन अस्त व्यस्त हो...
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की मानें तो पृथ्वी "रेड अलर्ट" पर है। वजह है दुनिया भर की सरकारों का...
ग्लोबल एनेर्जी मॉनिटर के नौवें वार्षिक सर्वे की मानें तो भविष्य में अपने कोयले के इस्तेमाल को लेकर भारत वैश्विक स्तर पर मिले जुले संकेत भेजता रहा है।
यह एक ज्ञात तथ्य है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में कई परिवर्तन हुए हैं। राज्य द्वारा संचालित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 2022 में 1902 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी चरम घटनाएं देखी गई हैं। जबकि बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इस बात के और भी सबूत सामने आ रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग भारतीय मानसून को कैसे प्रभावित कर रही है।
पेरिस (Paris) में सम्पन्न हुई समिट फॉर न्यू ग्लोबल फाइनेंसिंग पैक्ट (Summit for New Global Financing Pact) को दुनिया की सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े नियमित जलवायु सम्मेलन (CoP), जी7 और जी20 सम्मेलनों के अलावा एक और अंतरराष्ट्रीय बैठक के रूप में देखा जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए कितना घातक साबित हो सकता है उसका अंदाज़ा इसी से लगाया...
अकेले चीन वैश्विक उत्सर्जन के एक चौथाई से ज़्यादा के लिए ज़िम्मेदार, मगर सभी G20 देशों को निभानी होगी महत्वपूर्ण...

