दो दिन पहले की बात है। कुछ बच्चों से पता चला कि आठ साल का अंकित स्कूल आते समय रास्ते...
एक कड़वा सच जो मूंह बाए देख रहा है वो ये है कि चीन को छोड़कर, विकासशील देशों को 2030 तक जलवायु वित्त में कम से कम 2.4 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता है। वहीं 54 देशों में आर्थिक संकट ने उन्हें ऋण संकट में भी डाल दिया है, जिससे उनके विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली का रुख करने में बाधा आ रही है।
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने वार्षिक "जलवायु विज्ञान में 10 नई अंतर्दृष्टि" नाम की एक रिपोर्ट, यूएनएफसीसीसी के कार्यकारी सचिव, साइमन स्टिल के साथ प्रस्तुत किया।
'भारत में कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव' नामक एक हालिया विश्लेषण में, क्लाइमेट ट्रेंड्स ने बदलते ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रति भारत की कृषि की संवेदनशीलता को दर्शाने वाले साक्ष्य जुटाये हैं।
भारत वर्ष 2030 तक अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ाने की योजना पहले से ही बना रहा है, मगर ऐसा करने के लिये 293 बिलियन डॉलर की जरूरत पड़ेगी। वैश्विक थिंक टैंक ‘एम्बर’ की एक नयी रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है।
ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य को पहुंच के भीतर बनाए रखने के लिए सदी के मध्य तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन तक पहुंचने की राह में 2050 तक तेल और गैस के उपयोग में 75% से ज़्यादा कटौती करनी होगी।
फॉसिल फ्यूल (Fossil Fuel) से वैश्विक स्तर पर होने वाले एमिशन में वर्ष 2023 में एक बार फिर उछाल आया है और अब यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
एक प्रमुख वैश्विक अर्थशास्त्र कंसल्टेंसी, कैंब्रिज इकोनोमेट्रिक्स की एक हालिया रिपोर्ट, तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि की स्थिति में, रिन्यूबल एनेर्जी (Renewable Energy ) का रुख करने में तेजी लाने के महत्वपूर्ण वित्तीय लाभों को रेखांकित करती है।
अस्पतालों पर एक नया खतरा मंडरा रहा है। और यह खतरा लाई है बदलती जलवायु। जी हाँ, सही पढ़ा। चरम मौसम की घटनाएँ अस्पतालों को बंद तक करा सकती हैं।
दुनिया के लगभग सभी देश, दुनिया भर के कमजोर देशों को ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण होने वाले अत्यधिक खराब मौसम से निपटने में मदद करने के लिए बनाए किए गए लॉस एंड डैमेज फंड को चलाने के विवरण पर सहमत होने के लिए तैयार हैं।
चीन को छोड़कर, वैश्विक स्तर पर नए कोयला बिजली निर्माण में महत्वपूर्ण गिरावट आई है।
जलवायु वित्त के वितरण में इस गम्भीर खामी को उजागर करते इस अध्ययन की रिपोर्ट आज जारी की गयी।











