भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 3000 से ज्यादा पेशेवर लोगों को शामिल कर जलवायु परिवर्तन पर किये गये अब...
ग्लोबल कोल माइन ट्रैकर (Global Coal Mine Tracker) के डेटा से हमें दुनिया में 4300 सक्रिय और प्रस्तावित कोयला खदानों तथा परियोजनाओं में व्याप्त रोजगार के अवसरों के बारे में अपनी तरह का पहला जायजा मिलता है। यह खदानें दुनिया में होने वाले कुल कोयला उत्पादन में 90% से ज्यादा का योगदान करती हैं।
अल जाबेर ने पहले कई बार जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में चेतावनी दी है और क्लीन एनेर्जी में निवेश करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की है, लेकिन उन्होंने 2030 तक जीवाश्म ईंधन निवेश में $600 बिलियन की वार्षिक वृद्धि की वकालत भी की है और यह भी कहा है कि अब ज़रूरत है ऐसे दृष्टिकोण की जिसमें तेल और गैस उद्योग की प्रासंगिकता भी शामिल हो।
जलवायु परिवर्तन का मौसम की बदलती तर्ज से गहरा नाता है और यह ताकतवर चक्रवाती तूफानों तथा बारिश के परिवर्तित...
अगले दस सालों में ही शुरू हो सकता है देश में आंतरिक पलायन का सिलसिला विश्व बैंक की आज जारी...
दुनिया के 11 देशों के 36 धार्मिक संगठनों ने आज खुद को जीवाश्म ईंधन के कारोबार से अपना हर नाता...
दुनिया भर के युवाओं में कोरियन पॉप, या के-पॉप, संगीत ने धूम मचाई हुई है। लेकिन इस संगीत के प्रशंसक...
दुनिया भर के शोधकर्ताओं के एक समूह ने हाल में नेचर कम्युनिकेशन नामक पत्रिका में एक शोध पत्र प्रकाशित कर...
टाउन हॉल कार्यक्रम के माध्यम से आयोजित क्लाइमेट रेसिलियंट महाराष्ट्र (जलवायु के लिहाज से सतत महाराष्ट्र) का उद्देश्य आम नागरिकों,...
हालांकि देश की परिवहन प्रणाली तेज़ गति से विकास कर रही है, मगर उसी अनुपात में परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में भी बढ़त हो रही है। ध्यान रहे कि भारत में होने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन में परिवहन या ट्रांसपोर्ट सेक्टर का योगदान लगभग 14 प्रतिशत है। और इसमें से 90 प्रतिशत उत्सर्जन अकेले सड़क परिवहन से होता है।
संयुक्त राष्ट्र की 27वीं जलवायु वार्ता (27th Climate Talks), या कॉप 27 (COP 27), आज मिस्र में समाप्त हुई। जहां एक ओर इस सम्मेलन में जलवायु संकट (Climate Crisis) के सबसे कमजोर लोगों पर असर को कम करने पर अहम फैसले लिए गए, वहीं इस वार्ता में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारणों को दूर करने के लिए कुछ खास देखने या सुनने को नहीं मिला।
कार्यवाई की जगह चलाया गया जलवायु परिवर्तन को विवादित बनाने के लिए शंकाओं और गलत जानकारियों का कुचक्र मामला है...


