साल 2021 में कोयले और रिन्यूबल स्त्रोतों से जुड़ी ऊर्जा परियोजनाओं की एक एनालिसिस से पता चलता है कि साल 2021 में कोयला बिजली परियोजनाओं के लिए कोई नया वित्तपोषण नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, 2021 में नई ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कुल वित्तपोषण, वित्त वर्ष 2017 के स्तर की तुलना में 60% कम था।
कोलम्बिया सेंटर ऑन सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट (CCSI) ने आज रेन्युबल ऊर्जा में निवेश के कारकों और उसमें आने वाली बाधाओं पर आधारित अपनी दो नयी रिपोर्टें पेश कीं।
भारत द्वारा अक्षय ऊर्जा (renewable energy) और इलेक्ट्रिक वाहनों (electric vehicles) पर दी जाने वाली सब्सिडी वित्तीय वर्ष 2022 में दोगुनी से भी ज्यादा हो गयी है। मगर सरकार के सामने आने वाले वर्षों में देश के जलवायु सम्बन्धी लक्ष्यों को हासिल करने के लिये इस रफ्तार को बनाये रखने की चुनौती होगी।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Program) ने आज चार साल पूरे कर लिए और इसमें अब तक ₹6897.06 करोड़ खर्च हो चुके हैं। मगर 2019 पहचाने गए कुछ शीर्ष प्रदूषित शहरों ने अपने पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में बस मामूली सुधार ही दर्ज किया है और यह अब भी केंद्र सरकार द्वारा स्थापित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सुरक्षित सीमा मानकों से अधिक स्तर पर हैं।
अल जाबेर ने पहले कई बार जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में चेतावनी दी है और क्लीन एनेर्जी में निवेश करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की है, लेकिन उन्होंने 2030 तक जीवाश्म ईंधन निवेश में $600 बिलियन की वार्षिक वृद्धि की वकालत भी की है और यह भी कहा है कि अब ज़रूरत है ऐसे दृष्टिकोण की जिसमें तेल और गैस उद्योग की प्रासंगिकता भी शामिल हो।
देश की पूरी स्टील इंडस्ट्री को प्रेरणा देते हुए, भारत के अग्रणी स्टील निर्माताओं में से एक, जेएसडब्ल्यू स्टील, ResponsibleSteel™ का सदस्य बन गया है।
जिस दिन तमिलनाडु चक्रवात मंडौस (Cyclone Mandaus) के तट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिशन के शुभारंभ के साथ जलवायु लचीलापन की दिशा में काम करने की अपनी तैयारियों और प्रतिबद्धता पर फिर से जोर दिया है।
सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (CFA) की नई रिपोर्ट 'द कोल टेल : ट्रैकिंग इन्वेस्टमेंट्स इन कोल फायर्ड थर्मल पावर प्लांट्स इन इंडिया' ने देश में कोयले से चलने वाले बिजली घरों (coal power generation) को दी गई वित्तीय सहायता का खुलासा करते हुए बताया है कि साल 2005 से 2022 के बीच भारत में 84 राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं ने 1000 मेगा वाट या उससे ज्यादा की क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट संबंधी परियोजनाओं के लिए 7.62 लाख करोड़ रुपए का कर्ज उपलब्ध कराया है।
सर्दियों की आमद ने एक बार फिर गंगा के मैदानी इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक को 'खराब' और 'गंभीर' श्रेणियों के बीच ला खड़ा कर दिया है। बात की गंभीरता इसिस से पता चलती है कि दिल्ली-एनसीआर में दिसंबर के पहले पखवाड़े के सबसे तेज़ धूप और खुले आसमान वाले दिनों पर भी वायु गुणवत्ता 'खराब' (Air Pollution) की श्रेणी में ही रही।
अभी कुछ समय पहले तक उत्तराखंड (Uttarakhand) का रैनी गाँव सुर्खियों में था और अब, पास का ही जोशीमठ (Joshimath) खबरों में है। फिलहाल प्रशासन वहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की कवायद में है और विशेषज्ञ अपनी अपनी समझ से समस्या के कारणों पर गौर कर रहे हैं।
भारत का वित्तीय क्षेत्र एक लो-कार्बन एनेर्जी ट्रांज़िशन (low carbon energy transition) के जोखिमों के लिए बेहद संवेदनशील है, लेकिन एक मशहूर जर्नल में प्रकाशित नए पेपर की मानें तो इसके बावजूद भारत में छह में से सिर्फ एक फायनेंस प्रोफेशनल (finance professionals) उन जोखिमों की पहचान करने और उन्हें मैनेज करने का अनुभव रखता है।
भारत ने वर्ष 2025 तक 76 गीगावॉट यूटिलिटी स्केल सौर (solar power) और पवन बिजली (wind power) उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इससे भारत 19.5 बिलियन डॉलर (1588 बिलियन रुपए) बचा सकता है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (Global Energy Monitor) के ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।





